“प्यार, धोखा और मौत: 34 दिन, 12 मर्द, एक सवाल– बीवियों की बेवफाई कब तक लेती रहेगी जान?”
उत्तर प्रदेश में बीते 34 दिनों के भीतर एक दर्दनाक और चौंकाने वाला सिलसिला सामने आया है, जिसने रिश्तों की परिभाषा, शादी की पवित्रता और प्रेम के नाम पर छल की हदों को झकझोर कर रख दिया है। विवाह के बाद पराए आशिकों के चक्कर में उलझी पत्नियों की बेवफाई ने 12 पुरुषों की जान ले ली है। इनमें 6 की बेरहमी से हत्या कर दी गई, जबकि 5 ने खुदकुशी जैसा खौफनाक रास्ता चुना। दो ऐसे भी रहे जो मौत के करीब पहुंचकर भी बच गए।
इन घटनाओं में एक कहानी से जुड़ी दूसरी कहानी निकलती है– और हर कहानी एक जैसे दर्द और धोखे से भरी हुई है। उम्र की बात करें तो लगभग सभी पीड़ित पुरुष 30 से 40 की उम्र के थे– यानी वो दौर जब कोई अपने करियर और परिवार की नींव जमाने में जुटा होता है। लेकिन इन मर्दों को सबसे बड़ा धोखा मिला उनके सबसे करीबी रिश्ते से– उनकी पत्नी से।
कुशीनगर: देवर-भाभी के इश्क ने ले ली अख्तर की जान
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां एक पति को उसकी पत्नी और देवर के बीच पनपे अवैध संबंधों की कीमत जान देकर चुकानी पड़ी। अमनी नाम की महिला को अपने देवर इश्तियाक से प्रेम हो गया। पति अख्तर ने जब दोनों को आपत्तिजनक हालत में देख लिया, तो उसने देवर को घर से निकाल दिया। इश्तियाक पुणे चला गया, लेकिन कुछ समय बाद वह लौटा, और अमनी ने अख्तर को मनाया कि वह बस एक रात ठहरने दे।
इस एक रात की कीमत अख्तर को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। रात में पहले से तैयार प्लान के मुताबिक भाभी-देवर ने हैंडपंप के हैंडल से अख्तर पर वार कर दिया। अख्तर को अस्पताल ले जाया गया लेकिन वो बच नहीं सका।
मेरठ: मुस्कान ने किया प्यार में ऐसा खेल, पति का शव ड्रम में जमा दिया
इस पूरे सिलसिले में सबसे सनसनीखेज मामला मेरठ से आया, जिसने पूरे प्रदेश को हिला दिया। सौरभ राजपूत नाम का एक युवक लंदन में काम करता था। अपनी पत्नी मुस्कान के जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले, 24 फरवरी को वह भारत लौटा था। पर उसे नहीं पता था कि उसकी पत्नी अब पहले जैसी नहीं रही।
मुस्कान अपने स्कूल के बॉयफ्रेंड साहिल से फिर से जुड़ गई थी, और दोनों ने मिलकर सौरभ को रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली। 4 मार्च को मुस्कान ने सौरभ के खाने में बेहोशी की दवा मिलाई और फिर साहिल के साथ मिलकर उसकी चाकू से हत्या कर दी।
इतना ही नहीं, साजिश यहीं खत्म नहीं हुई। उन्होंने सौरभ के शव को टुकड़ों में काटा और एक नीले ड्रम में भर दिया। फिर सीमेंट की परत से उसे ऐसे सील कर दिया कि जब पुलिस ने शव निकाला तो पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर भी सन्न रह गए।
छह हत्याएं, पांच आत्महत्याएं, दो बचे – पर हर कहानी में कॉमन है ‘धोखा’
इन 34 दिनों में छह पतियों को उनकी पत्नियों और उनके प्रेमियों ने मिलकर मारा। वहीं पांच ऐसे थे जो पत्नी की बेवफाई या किसी और से रिश्ते की सच्चाई सामने आने पर खुदकुशी कर बैठे।
जहर वाली कॉफी पीकर और गोली लगने के बावजूद दो पतियों की जान बच गई, लेकिन उनके शरीर पर लगे जख्म और दिल पर हुआ वार शायद ही कभी भर पाए।
एक मामला ऐसा भी सामने आया जिसमें किसी की पत्नी बन चुकी एक महिला के साथ संबंध रखने वाला प्रेमी मारा गया!
अब सवाल यह है: क्या पति अब सिर्फ ‘इमोशनल बली’ बन कर रह गया है?
इन तमाम कहानियों में एक बात सामान्य है– रिश्तों का टूटता भरोसा और शादी की मर्यादा को तोड़ने वाले फैसले। सोशल मीडिया, मोबाइल और इंस्टेंट चैट्स की इस दुनिया में जहां एक ओर रिश्ते जल्दी जुड़ते हैं, वहीं वे उतनी ही आसानी से टूट भी जाते हैं।
मेरठ की मुस्कान की घटना ने इस पूरे विषय को एक सामाजिक विमर्श का मुद्दा बना दिया है। क्या विवाह जैसी संस्था अब सिर्फ एक समझौता बन कर रह गई है? क्या मर्द सिर्फ आर्थिक जिम्मेदारी निभाने वाला बन गया है? या फिर आज के समय में शादी और प्रेम के बीच की लकीर मिटती जा रही है?
अंत में यही सवाल उठता है– क्या प्यार अब मौत की वजह बन गया है?
इन 34 दिनों में 12 मर्द अपनी जान गंवा चुके हैं। औरतों की आशनाई, पुराने प्रेमियों की वापसी और शादी के बाहर रिश्तों की तड़प ने रिश्तों को खून में डुबो दिया है।
यह सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, ये उन घरों की कहानी है जिनमें अब मातम पसरा है। एक पति, एक बेटा, एक पिता अब सिर्फ खबर की लाइन बन चुका है। और पीछे रह गए हैं सिर्फ सवाल– जिनका जवाब शायद समाज को अब ढूंढना ही होगा।
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