सस्पेंस से भरी दहेज की ये कहानी: शादी के दो महीने बाद, एक पिता की दुनिया उजड़ गई
लखनऊ से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसमें दहेज की लालच ने एक बेटी की जिंदगी छीन ली। दो महीने पहले जिसकी शादी धूमधाम से हुई थी, आज वही बेटी एक बेरहम साजिश का शिकार बन गई। इस घटना ने न केवल एक पिता का सीना छलनी कर दिया, बल्कि समाज के उस कुरूप चेहरे को भी उजागर कर दिया, जहाँ बेटियाँ आज भी दहेज के लिए बलि चढ़ाई जाती हैं।
हरदोई जिले के ग्राम अतरौली निवासी और पूर्व सैन्यकर्मी कृष्ण कुमार सिंह की मंझली बेटी उपासना सिंह (27) की शादी 18 फरवरी 2025 को लखनऊ के सैरपुर थाना क्षेत्र के ग्राम दुग्गौर निवासी अभय प्रताप सिंह से हुई थी। अभय एक बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन ठेकेदार है। यह रिश्ता पहले उम्मीदों से भरा था, लेकिन शादी के कुछ ही दिन बाद से इसकी नींव दरकने लगी।
कृष्ण कुमार ने बताया कि बेटी की शादी के कुछ समय बाद ही अभय, उसके पिता रामकरन, बड़ा भाई आशीष, भाभी सोनम और ममिया ससुर संजीव लगातार दहेज में कार की मांग करने लगे। जब यह मांग पूरी नहीं हुई तो उपासना को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। उपासना ने कई बार फोन पर अपनी मां शशि देवी और बहनों जाह्नवी, मोहिनी को इस प्रताड़ना की जानकारी दी थी, लेकिन घरवाले उसे समझाते रहे कि समय के साथ सब ठीक हो जाएगा।
हालात तब और बिगड़ गए जब सोमवार 7 अप्रैल को उपासना के पिता कृष्ण कुमार, पत्नी शशि के कहने पर बेटी की ससुराल पहुंचे। वहाँ पर अभय और उसके परिजनों ने एक बार फिर कार या पांच लाख रुपये की मांग रखी। कृष्ण कुमार ने साफ शब्दों में अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि वह इतनी बड़ी रकम नहीं जुटा सकते। उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि इस मुद्दे पर अन्य रिश्तेदारों के साथ बैठकर बातचीत कर ली जाए।
पिता बेटी को ससुराल में छोड़कर हरदोई के लिए रवाना हो गए, लेकिन रास्ते में शाम करीब 5:30 बजे उनके पास एक अज्ञात नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने बताया कि उपासना की तबीयत अचानक बिगड़ गई है और उसे लखनऊ के केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। पिता घबराकर तुरंत वापस लौटे और सीधे ट्रॉमा सेंटर पहुंचे, लेकिन वहाँ न तो उपासना मिली और न ही उसका कोई रिकॉर्ड।
आखिरकार जब सच सामने आया, तो वह रोंगटे खड़े कर देने वाला था। पुलिस को सूचना मिली कि उपासना की गला घोंटकर हत्या कर दी गई है। उसके शरीर पर पिटाई के गंभीर निशान पाए गए। मंगलवार सुबह कृष्ण कुमार सिंह ने सैरपुर थाने में आरोपी दामाद और उसके परिवार वालों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने तेजी दिखाते हुए अभय प्रताप सिंह और उसके पिता रामकरन को गिरफ्तार कर लिया, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
यह मामला सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, यह समाज को आईना दिखाने वाला कड़वा सच है। जिस देश में बेटियों को लक्ष्मी माना जाता है, वहाँ उन्हें दहेज की मांग न पूरी होने पर मौत की नींद सुला देना, क्या यही हमारी सामाजिक प्रगति है?
अब सवाल उठता है — क्या उपासना को न्याय मिलेगा? क्या दहेज की इस मांग में शामिल हर चेहरा कानून के शिकंजे में आएगा? और सबसे अहम बात — क्या ऐसी घटनाएँ थमने का नाम लेंगी, या फिर कोई और उपासना अगली बार इस सामाजिक बीमारी की शिकार बनेगी?
(इस रिपोर्ट के ज़रिए हम उपासना के लिए न्याय और समाज के लिए जागरूकता की अपील करते हैं।)
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