क्या नवकार महामंत्र है सफलता की कुंजी? सीएम योगी ने बताया हजारों वर्षों पुरानी परंपरा का रहस्य!”
क्या एक मंत्र मानव जीवन की तमाम कठिनाइयों को पार कराने का मार्ग बन सकता है? क्या प्राचीन भारत की परंपराएं आज के समय में भी उतनी ही प्रासंगिक और प्रभावशाली हैं? इन सवालों का जवाब उस वक्त गूंजता सुनाई दिया जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्व नवकार महामंत्र दिवस के अवसर पर लखनऊ स्थित संगीत नाटक अकादमी में एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक संदेश दिया।
“नवकार महामंत्र केवल एक धार्मिक उच्चारण नहीं, बल्कि यह व्यावहारिक जीवन में सफलता, शांति और साधना की कुंजी है” — इन शब्दों के साथ मुख्यमंत्री ने न केवल नवकार महामंत्र की महिमा को रेखांकित किया, बल्कि इसके नौ संकल्पों को आधुनिक जीवन की चुनौतियों से निपटने के सूत्र के रूप में भी प्रस्तुत किया।
जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (जितो) द्वारा आयोजित इस विशेष समारोह में मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश को जैन तीर्थंकरों की महत्वपूर्ण भूमि बताते हुए कहा कि भगवान ऋषभदेव सिर्फ पहले तीर्थंकर ही नहीं, बल्कि अयोध्या के पहले राजा भी थे। उन्होंने कहा कि अयोध्या में पांच और वाराणसी में चार तीर्थंकरों का जन्म हुआ—जिन्होंने मोक्ष और धर्म का मार्ग प्रशस्त किया। मुख्यमंत्री ने जैन धर्म की महान परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि जब दुनिया अंधकार में थी, तब एक राजा ने सबकुछ त्यागकर लोकमंगल के लिए साधना का मार्ग चुना और उसी परंपरा में भगवान मनु और भगवान राम का भी जन्म हुआ।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वर्चुअली संबोधित किया और जैन धर्म के मूल सिद्धांतों को आत्मसात करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के उद्बोधन को ‘नई प्रेरणा का स्रोत’ बताते हुए कहा कि जैन धर्म की शिक्षाएं आज के युग में भी उतनी ही प्रभावशाली और मार्गदर्शक हैं जितनी हजारों वर्षों पहले थीं।
समारोह के दौरान जितो के चीफ पैट्रन पी.के. जैन, विनय जैन, सुबोध जैन और आदिश जैन ने मुख्यमंत्री को नवकार महामंत्र की भव्य तस्वीर और कलश भेंट किया। इस आध्यात्मिक माहौल में मुख्यमंत्री ने उपस्थितजनों से अपील की कि वे नवकार महामंत्र को न केवल श्रद्धा से जपें, बल्कि उसे जीवन के व्यवहारिक पक्ष में उतारें, क्योंकि यह मंत्र तीन प्रकार की मानवीय चुनौतियों—आदि दैविक (दैविक आपदा), आदि भौतिक (मानवजनित भय) और आध्यात्मिक (मानसिक व शारीरिक क्लेश)—से जूझने की शक्ति देता है।
योगी आदित्यनाथ ने महावीर जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नवकार महामंत्र न केवल आत्मा की शुद्धि का मार्ग है, बल्कि यह 84 लाख योनियों के बंधन से मुक्ति दिलाने वाला मंत्र है। इस मंत्र के जाप से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक संतुलन का संचार होता है।
कार्यक्रम में एमएलसी महेंद्र सिंह ने भी नवकार महामंत्र के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह केवल धार्मिक आस्था नहीं बल्कि जीवन जीने की कला है। जितो द्वारा पहली बार देशभर में एक साथ इस आयोजन को करने के लिए मुख्यमंत्री ने संगठन को विशेष बधाई भी दी।
अब सवाल उठता है — क्या नवकार महामंत्र सिर्फ एक धार्मिक परंपरा है या वास्तव में जीवन की सभी चुनौतियों से पार पाने का साधन?
सीएम योगी और प्रधानमंत्री मोदी के संदेशों से साफ है कि भारत की हजारों वर्षों पुरानी परंपराएं केवल इतिहास नहीं, बल्कि आज की पीढ़ी के लिए भी एक मार्गदर्शक शक्ति बन सकती हैं।
और शायद यही कारण है कि आज जब दुनिया तनाव, भ्रम और भय से जूझ रही है, तब भारत की आध्यात्मिक परंपराएं जैसे नवकार महामंत्र वैश्विक समाधान के रूप में उभर रही हैं।
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