डोनाल्ड ट्रंप और जेलेंस्की के बीच तीखी बहस: शांति की बजाय डील पर जोर, सौदे का क्या हुआ?
बीते शुक्रवार को अमेरिका के ओवल ऑफिस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। यह बैठक रूस-यूक्रेन युद्ध में शांति स्थापित करने के उद्देश्य से थी, जिसमें दोनों देशों के बीच प्रमुख खनिज डील पर भी चर्चा होनी थी। बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी मौजूद थे, लेकिन अंततः यह बैठक कुछ अप्रत्याशित मोड़ पर पहुंच गई।
बैठक की शुरुआत सामान्य रही, लेकिन जैसे ही बातचीत अपने चरम पर पहुंची, दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। ट्रंप, जो कि डील पर साइन कराने की कोशिश कर रहे थे, ने कहा कि वह शांति के मुद्दे पर अभी बात नहीं करना चाहते थे। वे बस चाहते थे कि डील पर साइन हो जाए। वहीं, जेलेंस्की ने शांति कायम करने के लिए एक स्थाई उपाय की बात की और अमेरिकी सुरक्षा की गारंटी मांगी, जिस पर ट्रंप और उपराष्ट्रपति वेंस का रुख काफी कड़ा हो गया।
“आप अपमान कर रहे हैं!” वहां से बहस तेज हो गई जब ट्रंप ने जेलेंस्की पर आरोप लगाया कि वह लाखों लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं और उनकी कार्रवाई तीसरे विश्व युद्ध को जन्म दे सकती है। जेलेंस्की ने इस पर जवाब दिया कि वे शांति चाहते हैं, लेकिन रूस द्वारा लगातार सीजफायर का उल्लंघन किया जा रहा है। सुरक्षा की गारंटी की मांग करने पर ट्रंप और वेंस भड़क गए। स्थिति इतनी खराब हो गई कि ट्रंप ने जेलेंस्की को बैठक छोड़ने का निर्देश दे दिया।
क्या हुआ डील का? इस बहस के बाद, जो डील साइन होनी थी, वह पूरी तरह से रुक गई। दोनों नेताओं के बीच असहमति इतनी गहरी हो गई कि किसी भी प्रकार के समझौते की संभावना समाप्त हो गई। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि वह शांति के पक्ष में नहीं हैं, और जब भी जेलेंस्की शांति के लिए तैयार होंगे, वे वापस आ सकते हैं। वहीं, जेलेंस्की ने अमेरिकी लोगों और राष्ट्रपति ट्रंप का धन्यवाद किया, लेकिन वह अपनी सुरक्षा की गारंटी की मांग करते रहे।
यह बैठक न केवल रूस-यूक्रेन युद्ध के बारे में नीतिगत मोड़ों को दिखाती है, बल्कि यह भी बताती है कि युद्ध के दौर में वैश्विक नेताओं के बीच किसी भी मुद्दे पर सहमति की उम्मीद रखना कितनी कठिन हो सकती है।
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