लखनऊ में आशा बहनों का जोरदार प्रदर्शन: मानदेय बढ़ाने और नियमितीकरण की मांग को लेकर सड़क जाम

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के इको गार्डन में शुक्रवार को अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहीं आशा बहनों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों से हजारों की संख्या में पहुंचीं आशा कार्यकर्ताओं और संगिनियों ने मानदेय बढ़ाने, नियमितीकरण और अन्य कार्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग को लेकर आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के दौरान आशा वर्करों ने नारेबाजी करते हुए सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया।

वहीं अपनी मांगों को लेकर महिला प्रदर्शनकारियों ने इको गार्डन के बाहर सड़क जाम कर दिया, जिससे इलाके में यातायात प्रभावित हुआ और राहगीरों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा। आशा कार्यकर्ताओं का कहना था कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रही हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का उचित समाधान नहीं हो पा रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि उनके मानदेय में बढ़ोतरी की जाए, नियमितीकरण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं और काम के दौरान जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

गेट बंद किए जाने से बढ़ा आक्रोश, दोपहर तीन बजे बाहर निकल सकीं आशा कार्यकर्ता

प्रदर्शन के दौरान इको गार्डन परिसर में काफी गहमागहमी बनी रही। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, पुलिस प्रशासन की ओर से परिसर का गेट बंद कर दिए जाने के कारण आशा कार्यकर्ताओं को बाहर निकलने में परेशानी हुई। बताया गया कि गेट बंद रहने के दौरान बड़ी संख्या में आशा बहनें परिसर के अंदर ही रहीं और बाहर नहीं निकल सकीं। इसके बाद दोपहर करीब तीन बजे गेट खोला गया, जिसके बाद हजारों की संख्या में आशा कार्यकर्ता बाहर निकल पाईं। गेट बंद किए जाने को लेकर प्रदर्शनकारियों में नाराजगी देखने को मिली। इस दौरान कुछ महिला आशा वर्करों ने इको गार्डन की दीवार भी फांदने की भी कोशिशि की।

वहीं आशा बहनों ने प्रशासन के इस रवैये पर रोष जताते हुए कहा कि अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाना उनका अधिकार है और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। इको गार्डन में पिछले कई दिनों से विभिन्न स्वास्थ्यकर्मी अपनी मांगों और अधिकारों को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी क्रम में शुक्रवार को आशा बहनों ने भी आंदोलन में शामिल होकर अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया।

शाम को मुख्य चौराहे पर भी दिया धरना, समझाने के बाद समाप्त हुआ प्रदर्शन

इको गार्डन के बाहर प्रदर्शन के बाद शुक्रवार शाम को हजारों की संख्या में आशा कार्यकर्ताओं ने इको गार्डन के मुख्य चौराहे पर भी धरना शुरू कर दिया। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के जुटने से क्षेत्र में हलचल बढ़ गई और यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ा। इसके बाद प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारी आशा बहनों को समझाने का प्रयास किया गया। प्रशासन के समझाने के बाद आशा कार्यकर्ताओं ने चौराहे पर चल रहा धरना समाप्त कर दिया।

हालांकि, प्रदर्शन के दौरान आशा बहनों ने स्पष्ट किया कि उनकी प्रमुख मांगें मानदेय में बढ़ोतरी, नियमितीकरण और अन्य सुविधाओं से जुड़ी हैं। उनका कहना था कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक वे अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाती रहेंगी। शुक्रवार को हुए प्रदर्शन के दौरान आशा कार्यकर्ताओं की बड़ी भागीदारी ने उनके आंदोलन को चर्चा में ला दिया।

राष्ट्रीय हिंदू रक्षा परिषद ने दिया समर्थन

आशा कार्यकर्ताओं के आंदोलन को लेकर राष्ट्रीय हिंदू रक्षा परिषद के राष्ट्रीय संयोजक मुकेश सनातनी ने भी समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि संगठन आशा बहनों की लड़ाई में उनके साथ खड़ा है और उन्हें उनका हक एवं अधिकार दिलाने के लिए काम करेगा। मुकेश सनातनी ने आशा कार्यकर्ताओं की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और मांगों के समाधान के लिए उचित कदम उठाए जाने चाहिए।

उन्होंने आशा बहनों के प्रदर्शन के दौरान मानदेय बढ़ाने और नियमितीकरण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। इस दौरान राष्ट्रीय हिंदू रक्षा परिषद की ओर से नीरज सनातनी, शीतल सनातनी, मनीष सनातनी, महेंद्र सनातनी और संतोष सनातनी समेत तमाम सभी कार्यकर्ता और पदाधिकारियों ने आशा कार्यकर्ताओं के आंदोलन को लेकर उन्हें समर्थन दिया। अब आशा वर्कर महिला प्रदर्शनकारियों की मांगों पर शासन-प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर आंदोलन से जुड़े राष्ट्रीय हिंदू रक्षा परिषद की नजर बनी हुई है।

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