डोनाल्ड ट्रंप का नया कदम: गोल्ड कार्ड वीजा स्कीम से अमेरिका के खजाने में आएगा 5 ट्रिलियन डॉलर!
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 20 जनवरी को अपने पद ग्रहण के बाद से लगातार ताबड़तोड़ फैसले लेने का सिलसिला जारी रखा है। सरकारी खर्चों पर कड़ी नजर रखने के लिए डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी की स्थापना करने से लेकर अवैध प्रवासियों को डिपोर्ट करने तक, ट्रंप ने कई बड़े कदम उठाए हैं। अब उन्होंने एक और नई और विवादास्पद योजना का ऐलान किया है, जिसे “गोल्ड कार्ड वीजा स्कीम” कहा जा रहा है। इस स्कीम के तहत ट्रंप ने अमेरिकी खजाने में 5 ट्रिलियन डॉलर की संभावना जताई है, जो न केवल अमेरिका की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे सकता है, बल्कि वैश्विक निवेशकों को भी आकर्षित करेगा।
कैसे काम करेगा गोल्ड कार्ड वीजा? गोल्ड कार्ड वीजा स्कीम अमेरिकी रेजीडेंसी के लिए एक नए रास्ते के रूप में पेश की गई है। हालांकि यह स्कीम अमेरिकी नागरिकता नहीं देती, लेकिन यह एक ग्रीन कार्ड की तरह होगा, जिसमें निवेशकों को अधिक सुविधाएं दी जाएंगी। ट्रंप ने इस योजना में शामिल होने के लिए 50 लाख डॉलर (लगभग 44 करोड़ रुपये) की फीस निर्धारित की है। यह राशि निवेशकों को अमेरिका में रेजीडेंसी हासिल करने का अधिकार प्रदान करेगी, जिसमें उन्हें कई प्रकार के लाभ और सुविधाएं मिलेंगी।
यह स्कीम यूरोप और कैरेबियाई देशों में पहले से लागू की जा चुकी है, और अब ट्रंप इसे अमेरिका में लागू करने की योजना बना रहे हैं। भारत सहित दुनिया के करीब 100 देशों के नागरिक इस प्रकार की स्कीम का लाभ उठाते हुए अपनी नागरिकता या रेजीडेंसी हासिल कर चुके हैं।
5 ट्रिलियन डॉलर का इन्कम? जब ट्रंप ने ओवल ऑफिस में इस योजना का ऐलान किया, तो उन्होंने कहा कि अगर 10 लाख लोग भी इस गोल्ड कार्ड वीजा के तहत अमेरिका में निवेश करते हैं, तो इससे अमेरिकी खजाने में लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर का इन्कम हो सकता है। इससे न केवल अमेरिका का कर्ज कम होगा, बल्कि यह अमेरिकी सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत बन सकता है। इस योजना से अमेरिका को भारी वित्तीय लाभ हो सकता है, जो देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा।
बिजनेस टॉप पर, टैलेंट अमेरिका में ट्रंप ने गोल्ड कार्ड वीजा को एक और महत्वपूर्ण उद्देश्य से जोड़ा है – ग्लोबल बिजनेस में टॉप पर बने रहना। उनके अनुसार, यह स्कीम दुनिया भर के अमीर व्यवसायियों और निवेशकों को अमेरिका आकर्षित करेगी। 50 लाख डॉलर का शुल्क भरकर, निवेशक अमेरिका में अपने बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए दुनिया भर के टॉप टैलेंट को लाने में सक्षम होंगे। खासकर आईवी लीग कॉलेजों से पढ़े-लिखे स्टूडेंट्स को अमेरिकी कंपनियां इस योजना के तहत अमेरिका लाने के लिए प्रेरित होंगी। इससे अमेरिका के बिजनेस वातावरण में नवाचार और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
EB-5 वीजा से अलग अमेरिका में वर्तमान में EB-5 वीजा स्कीम के तहत निवेशक अमेरिकी व्यवसायों में निवेश करते हैं और कम से कम 10 लोगों को रोजगार देने की शर्त पर रेजीडेंसी प्राप्त करते हैं। हालांकि, गोल्ड कार्ड वीजा स्कीम EB-5 वीजा से अलग है। इसमें निवेशक सीधे सरकार को 50 लाख डॉलर की फीस चुकाएंगे, बजाय इसके कि वह किसी विशेष व्यवसाय में निवेश करें। इस प्रकार, यह योजना अधिक सरल और सीधी प्रक्रिया प्रदान करती है।
क्या संसद से मंजूरी की जरूरत? गोल्ड कार्ड वीजा स्कीम के बारे में अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि इसे लागू करने के लिए अमेरिकी संसद से अनुमोदन की आवश्यकता होगी या नहीं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना लागू होती है तो यह अमेरिका के लिए एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है।
यह योजना न केवल अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लाभ पहुंचा सकती है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर अमेरिका को एक आकर्षक निवेश स्थल भी बना सकती है। ट्रंप के इस कदम से अमेरिका को भविष्य में बहुत बड़ी वित्तीय मदद मिल सकती है, लेकिन इसके बारे में कई सवाल अभी भी अनसुलझे हैं।
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