दिल्ली: रूस-यूक्रेन जंग रोकने की उम्मीद अब पीएम मोदी से
रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग को लेकर दुनिया अब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता में आने से पहले कई दावे किए थे कि वे इस संघर्ष को खत्म करेंगे, लेकिन अब तक उनकी कोशिशें नाकाम रही हैं। ऐसे में यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से लेकर यूरोपियन यूनियन (EU) तक के नेता मानते हैं कि शांति स्थापना में भारत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। SCO मंच पर भी पीएम मोदी की उपस्थिति और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ उनकी मुलाकात ने यह संकेत दिया कि भारत युद्धविराम का सूत्रधार बन सकता है।
पेरिस में यूरोपीय नेताओं और जेलेंस्की के बीच हुई हालिया बातचीत के दौरान भी यह मुद्दा उठा। उसी समय यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर ने पीएम मोदी से फोन पर चर्चा की। इसके बाद EU ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि भारत रूस को युद्ध समाप्त करने और शांति का रास्ता बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है। वहीं, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा से मुलाकात कर भारत की ओर से संघर्ष को समाप्त करने और स्थायी शांति लाने का समर्थन दोहराया।
भारत का अब तक का रुख संतुलित रहा है। उसने रूस के आक्रमण की खुलकर आलोचना नहीं की, लेकिन बार-बार बातचीत और शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया। पीएम मोदी ने कई मौकों पर साफ कहा कि युद्ध के मैदान में कोई समाधान नहीं निकल सकता और बंदूक की छांव में बातचीत संभव नहीं है। भारत ने रूस के साथ अपने संबंध बनाए रखते हुए यूक्रेन को मानवीय सहायता भी भेजी है। रियायती दरों पर तेल आयात के बावजूद, भारत ने वैश्विक मंचों पर शांति का संदेश देना जारी रखा है।
दुनिया में पीएम मोदी को शांति दूत मानने की एक बड़ी वजह उनके संतुलित कूटनीतिक रिश्ते हैं। पुतिन और जेलेंस्की दोनों उनसे सीधे बात करते हैं और उनकी राय को महत्व देते हैं। पीएम मोदी ने भारत-चीन सीमा विवाद को भी बातचीत से सुलझाने का उदाहरण पेश किया, जिससे उनकी छवि और मजबूत हुई। इसी वजह से आज दुनिया मान रही है कि रूस-यूक्रेन युद्ध की आग बुझाने में सबसे प्रभावी भूमिका भारत और खासकर पीएम मोदी की हो सकती है।
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