May 1, 2026

भारत-जापान: 2030 तक तैयार हो सकती है नई लंबी दूरी की मिसाइल

भारत और जापान रक्षा सहयोग के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहे हैं। दोनों देश मिलकर नई पीढ़ी की हवा से हवा में मार करने वाली लंबी दूरी की मिसाइल (BVRAAM) बनाने पर विचार कर रहे हैं, जिसकी रेंज 300 किलोमीटर से भी ज्यादा होगी। यह मिसाइल भारत के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) और जापान के ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम (GCAP) जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों के लिए खास तौर पर डिजाइन की जाएगी।

रक्षा सूत्रों का मानना है कि यह पहल चीन की बढ़ती सैन्य क्षमताओं का जवाब होगी। चीन पहले ही PL-16 और PL-17 जैसी मिसाइलें तैनात कर चुका है, जिनकी रेंज 200 से 400 किलोमीटर तक है और जो दुश्मन के एयरबोर्न वार्निंग सिस्टम (AWACS) और टैंकर विमानों को आसानी से निशाना बना सकती हैं। ऐसे में भारत और जापान को भी एक ऐसी सुपर मिसाइल की आवश्यकता है, जो लंबी दूरी पर सटीक और घातक प्रहार कर सके।

भारत ने DRDO के जरिए पहले ही अस्त्र सीरीज की मिसाइलें विकसित की हैं। अस्त्र Mk-I को भारतीय वायुसेना में शामिल किया जा चुका है, जबकि अस्त्र Mk-II अगले साल ट्रायल के लिए तैयार है। वहीं, अस्त्र Mk-III (गांडिव) की रेंज 340 किलोमीटर से ज्यादा होगी और 2030 तक इसके शामिल होने की उम्मीद है। दूसरी ओर, जापान के पास AAM-4TDR मिसाइल मौजूद है, जिसकी रेंज 160-170 किलोमीटर है, लेकिन यह चीन की नई मिसाइलों के मुकाबले कमतर मानी जाती है।

हाल ही में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर में चीनी PL-15E मिसाइलों से जुड़ा डेटा जापान को उपलब्ध कराया। इससे दोनों देशों के बीच इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर्स (ECCM) तकनीक को लेकर सहयोग और मजबूत हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संयुक्त परियोजना सफल होती है, तो 2030 तक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत-जापान की वायुसेनाओं को एक नई सुपर मिसाइल मिल जाएगी।

इस साझेदारी को दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह मिसाइल न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन बनाएगी, बल्कि भारत और जापान को इंडो-पैसिफिक में मजबूत स्थिति दिलाएगी।

भारत-जापान: 2030 तक तैयार हो सकती है नई लंबी दूरी की मिसाइल

भारत और जापान रक्षा सहयोग के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहे हैं। दोनों देश मिलकर नई पीढ़ी की हवा से हवा में मार करने वाली लंबी दूरी की मिसाइल (BVRAAM) बनाने पर विचार कर रहे हैं, जिसकी रेंज 300 किलोमीटर से भी ज्यादा होगी। यह मिसाइल भारत के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) और जापान के ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम (GCAP) जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों के लिए खास तौर पर डिजाइन की जाएगी।

रक्षा सूत्रों का मानना है कि यह पहल चीन की बढ़ती सैन्य क्षमताओं का जवाब होगी। चीन पहले ही PL-16 और PL-17 जैसी मिसाइलें तैनात कर चुका है, जिनकी रेंज 200 से 400 किलोमीटर तक है और जो दुश्मन के एयरबोर्न वार्निंग सिस्टम (AWACS) और टैंकर विमानों को आसानी से निशाना बना सकती हैं। ऐसे में भारत और जापान को भी एक ऐसी सुपर मिसाइल की आवश्यकता है, जो लंबी दूरी पर सटीक और घातक प्रहार कर सके।

भारत ने DRDO के जरिए पहले ही अस्त्र सीरीज की मिसाइलें विकसित की हैं। अस्त्र Mk-I को भारतीय वायुसेना में शामिल किया जा चुका है, जबकि अस्त्र Mk-II अगले साल ट्रायल के लिए तैयार है। वहीं, अस्त्र Mk-III (गांडिव) की रेंज 340 किलोमीटर से ज्यादा होगी और 2030 तक इसके शामिल होने की उम्मीद है। दूसरी ओर, जापान के पास AAM-4TDR मिसाइल मौजूद है, जिसकी रेंज 160-170 किलोमीटर है, लेकिन यह चीन की नई मिसाइलों के मुकाबले कमतर मानी जाती है।

हाल ही में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर में चीनी PL-15E मिसाइलों से जुड़ा डेटा जापान को उपलब्ध कराया। इससे दोनों देशों के बीच इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर्स (ECCM) तकनीक को लेकर सहयोग और मजबूत हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संयुक्त परियोजना सफल होती है, तो 2030 तक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत-जापान की वायुसेनाओं को एक नई सुपर मिसाइल मिल जाएगी।

इस साझेदारी को दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह मिसाइल न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन बनाएगी, बल्कि भारत और जापान को इंडो-पैसिफिक में मजबूत स्थिति दिलाएगी।

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