दिल्ली सरकार ने व्यापारियों और उद्यमियों के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब राजधानी के कारोबारी बिना किसी संपत्ति को गिरवी रखे 10 करोड़ रुपये तक का लोन ले सकेंगे। इसके लिए दिल्ली सरकार ने केंद्र सरकार की संस्था क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (CGTMSE) के साथ समझौता किया है। इस पहल से खासतौर पर छोटे और मध्यम व्यापारियों को बड़ी वित्तीय राहत मिलने की उम्मीद है।
समझौते पर हस्ताक्षर के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह फैसला दिल्ली के व्यापारियों को आर्थिक रूप से मजबूत करेगा और ‘विकसित दिल्ली’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में सहायक होगा। उन्होंने बताया कि इस योजना का उद्देश्य कारोबारियों के लिए कर्ज लेना आसान बनाना है, ताकि वे बिना किसी डर और बाधा के अपने व्यवसाय का विस्तार कर सकें। लंबे समय से गिरवी की शर्त के कारण कई उद्यमी बैंक ऋण से वंचित रह जाते थे, अब यह समस्या काफी हद तक दूर होगी।
इस योजना के तहत अगर कोई व्यापारी लोन चुकाने में असफल रहता है, तो CGTMSE के माध्यम से केंद्र सरकार 75 से 90 प्रतिशत तक की गारंटी देगी, जबकि शेष राशि की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार उठाएगी। इससे बैंकों का जोखिम भी कम होगा और वे अधिक संख्या में व्यापारियों को ऋण देने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
दिल्ली सरकार ने इस योजना के लिए 2500 करोड़ रुपये तक के बिना गारंटी वाले ऋण वितरण का लक्ष्य रखा है। लोन की अदायगी को सुरक्षित रखने के लिए 50 करोड़ रुपये का एक विशेष फंड भी बनाया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि शुरुआती तौर पर एक लाख लाभार्थियों को इस योजना से जोड़ने का लक्ष्य है, लेकिन पात्रता के आधार पर लाभार्थियों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। यह योजना मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस और रिटेल सेक्टर सहित सभी क्षेत्रों के लिए लागू होगी।
उद्योग मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि महिला उद्यमियों और अनुसूचित जाति वर्ग के कारोबारियों को इस योजना में अतिरिक्त राहत दी गई है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर सरकार ऋण राशि और कुल फंड को और बढ़ाने के लिए भी तैयार है। कुल मिलाकर यह फैसला दिल्ली के व्यापारिक माहौल को नई ऊर्जा देने और रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
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