दुश्मन देश के संभावित हवाई हमले से बचाव और आपात हालात से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में विशेष मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस दौरान पूरे क्षेत्र में ब्लैकआउट किया गया, ताकि किसी भी स्थिति में दुश्मन के हवाई जहाज या मिसाइलों को रोशनी दिखाई न दे। मॉक ड्रिल का उद्देश्य नागरिक सुरक्षा की तैयारियों का परीक्षण करना और आम लोगों को सुरक्षा प्रोटोकॉल के प्रति जागरूक करना रहा।
शाम ठीक 6:00 बजे जैसे ही खतरे का सायरन बजा, कलेक्ट्रेट परिसर और उसके आसपास के इलाकों में बिजली की आपूर्ति पूरी तरह से बंद कर दी गई। ब्लैकआउट होते ही स्वयंसेवकों और सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाल लिया। सड़कों पर हलचल नियंत्रित की गई और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने के निर्देश दिए गए। इस दौरान पूरे इलाके में अंधेरा छा गया, जिससे वास्तविक युद्ध जैसी स्थिति का अभ्यास किया जा सके।
मॉक ड्रिल में नागरिक सुरक्षा कर्मियों के साथ आपदा मित्र, होमगार्ड, एनसीसी, पुलिस बल और अन्य विभागों की टीमें सक्रिय रहीं। सभी एजेंसियों ने आपसी समन्वय के साथ अपनी-अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। पुलिस प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और फायर ब्रिगेड ने संयुक्त रूप से अपनी तैयारियों का परीक्षण किया, ताकि किसी आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा घायलों को सुरक्षित तरीके से अस्पताल तक पहुंचाने की प्रक्रिया का भी अभ्यास कराया गया। एंबुलेंस मूवमेंट, प्राथमिक उपचार और आपातकालीन सेवाओं की तत्परता को परखा गया। अधिकारियों ने बताया कि आधुनिक समय में युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शहरों और आम नागरिकों की सुरक्षा भी उतनी ही अहम होती है।
जिलाधिकारी शाहजहांपुर धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि इस तरह की मॉक ड्रिल से न सिर्फ प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा होती है, बल्कि आम नागरिकों को भी यह समझने में मदद मिलती है कि संकट के समय उन्हें कैसे व्यवहार करना चाहिए। प्रशासन ने भविष्य में भी इस तरह के अभ्यास जारी रखने की बात कही है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
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