श्रवण साहू हत्याकांड: उम्रकैद की सजा पाए बाबू खान को हाई कोर्ट से मिली जमानत, अजय पटेल के फैसले को बनाया आधार
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के चर्चित श्रवण साहू हत्याकांड में बड़ा अपडेट सामने आया है। लखनऊ हाई कोर्ट की अवकाशकालीन खंडपीठ ने इस मामले में उम्रकैद की सजा पाए बाबू खान को जमानत दे दी है। कोर्ट ने अपने आदेश में सह-अभियुक्त अजय पटेल को पहले मिली जमानत को आधार बनाते हुए कहा कि बाबू खान का मामला भी उसी तरह का है, और उसे भी समान लाभ मिलना चाहिए।
यह आदेश हाई कोर्ट के जस्टिस पंकज भाटिया और जस्टिस छितिज शौलेंद्र की अवकाशकालीन पीठ ने बाबू खान की ओर से दाखिल अपील और जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए पारित किया। अदालत ने कहा कि अभियोजन की ओर से हत्या की साजिश में बाबू खान की संलिप्तता को साबित करने के लिए प्रथम दृष्टया कोई ठोस साक्ष्य नहीं पेश किया जा सका, जैसा कि अजय पटेल के मामले में भी था।
अजय पटेल को पहले मिल चुकी है राहत
सह अभियुक्त अजय पटेल को भी लखनऊ हाई कोर्ट ने 21 अप्रैल 2025 को इसी आधार पर जमानत दी थी कि उसके खिलाफ हत्या की साजिश रचने से संबंधित कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं था। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि जब अभियोजन द्वारा दोनों मामलों में समान रूप से कमजोर साक्ष्य प्रस्तुत किए गए हैं, तो बाबू खान को भी अजय पटेल जैसी जमानत का लाभ मिलना चाहिए।
सीबीआई अदालत का फैसला
गौरतलब है कि 22 अगस्त 2024 को सीबीआई की विशेष अदालत ने बाबू खान को श्रवण साहू की हत्या की साजिश रचने का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। साथ ही उस पर एक लाख दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।
श्रवण साहू एक समाजसेवी और कारोबारी थे, जिनकी हत्या 12 साल पहले हुई थी। यह हत्याकांड उस समय प्रदेश भर में सुर्खियों में आया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। जांच के बाद बाबू खान समेत कुछ अन्य लोगों को हत्या की साजिश में शामिल पाते हुए आरोपित बनाया गया था।
बाबू खान को मिली जमानत के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि क्या अभियोजन पक्ष इस आदेश के खिलाफ आगे अपील करेगा या नहीं। फिलहाल कोर्ट ने बाबू खान को कुछ शर्तों के साथ रिहा करने का निर्देश दिया है, जिसमें अदालत की अनुमति के बिना देश छोड़कर न जाने और नियमित रूप से पेशी पर उपस्थित रहने जैसी शर्तें शामिल हैं।
यह मामला न केवल कानूनी दृष्टिकोण से अहम बन गया है, बल्कि न्याय प्रक्रिया की निष्पक्षता और अभियोजन की भूमिका पर भी सवाल खड़े करता है। अब देखना यह होगा कि आगे इस केस में क्या नया मोड़ आता है।
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