ईसाबेला थोबर्न कॉलेज में ‘विकसित भारत 2047’ पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित, 200 शिक्षकों और विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा

लखनऊ। ईसाबेला थोबर्न कॉलेज, लखनऊ की ओर से ‘विकसित भारत 2047 नवाचार, सतत विकास एवं समावेशी विकास’ विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य शोधकर्ताओं, शिक्षकों और विद्यार्थियों को एक साझा अकादमिक मंच उपलब्ध कराना था, जहां वे वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य पर विचार-विमर्श कर सकें। सम्मेलन में विभिन्न शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों के करीब 200 शिक्षकों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।

इनमें इसाबेला थोबर्न कॉलेज, एरा यूनिवर्सिटी, इंटीग्रल यूनिवर्सिटी, सीएसआईआर–भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान तथा डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय सहित अन्य संस्थानों के प्रतिभागी शामिल रहे। सम्मेलन के दौरान प्रतिभागियों ने मौखिक और पोस्टर प्रस्तुतियों के माध्यम से अपने शोध निष्कर्षों, नवीन विचारों और अकादमिक योगदानों को साझा किया। साथ ही, छह आमंत्रित व्याख्यानों के माध्यम से उभरते शोध क्षेत्रों, तकनीकी नवाचार, सतत विकास की प्रथाओं और समावेशी विकास से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई।

डॉ. अम्मार रिज़वी ने अनुसंधान सहयोग बढ़ाने पर दिया जोर

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में उत्तर प्रदेश के पूर्व कार्यवाहक मुख्यमंत्री डॉ. अम्मार रिज़वी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में विभिन्न विषयों के बीच अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान विकसित करने में शिक्षा, शोध और नवाचार की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की अध्यक्ष डॉ. ईएस चार्ल्स ने की। उन्होंने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान की उपयोगिता, गुणवत्ता और अकादमिक उत्कृष्टता के महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर महाविद्यालय की कार्यवाहक प्राचार्या डॉ. (मेजर) नीरजा मसीह तथा आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) की समन्वयक डॉ. मीनाक्षी सिंह भी मौजूद रहीं।

अकादमिक उत्कृष्टता और टीम भावना को बताया सफलता का आधार

महाविद्यालय की कार्यवाहक प्राचार्या डॉ. (मेजर) नीरजा मसीह ने अपने प्रेरणादायी विचारों से आयोजन समिति और प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने सम्मेलन की सफलता सुनिश्चित करने में समर्पण, टीम भावना और अकादमिक उत्कृष्टता के महत्व पर बल दिया। सम्मेलन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, पर्यावरणीय सततता और समावेशी विकास को प्राथमिकता देना आवश्यक है। वक्ताओं और प्रतिभागियों ने उच्च शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने, युवा शोधकर्ताओं को प्रोत्साहित करने और शोध के माध्यम से सामाजिक समस्याओं के समाधान तलाशने के लिए शिक्षण संस्थानों को निरंतर प्रयास करने चाहिए।

मौखिक और पोस्टर प्रस्तुतियों से साझा किए शोध निष्कर्ष

सम्मेलन के दूसरे सत्र में मौखिक प्रस्तुतियां और तीसरे सत्र में पोस्टर प्रस्तुतियां आयोजित की गईं। इन सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को अपने शोध कार्य प्रस्तुत करने, नए विचारों का आदान-प्रदान करने तथा अन्य शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों से सुझाव प्राप्त करने का अवसर मिला। विभिन्न विषयों पर प्रस्तुत शोध कार्यों ने समकालीन अकादमिक गतिविधियों और नवाचार की संभावनाओं को सामने रखा। इसके अतिरिक्त, छह आमंत्रित व्याख्यानों ने सम्मेलन की अकादमिक गुणवत्ता को और समृद्ध किया। विशेषज्ञों ने अपने व्याख्यानों में उभरते शोध क्षेत्रों, सतत विकास की रणनीतियों, तकनीकी प्रगति और समावेशी विकास की संभावनाओं पर महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। इन व्याख्यानों के माध्यम से प्रतिभागियों को वर्तमान शोध प्रवृत्तियों और भविष्य की संभावनाओं को समझने का अवसर मिला।

सतत और समावेशी भारत के निर्माण में शिक्षा की भूमिका रेखांकित

सम्मेलन ने इसाबेला थोबर्न कॉलेज की अकादमिक उत्कृष्टता, अनुसंधान संवर्धन, नवाचार और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के प्रति प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया। आयोजन के दौरान इस बात को प्रमुखता से रेखांकित किया गया कि विकसित भारत @ 2047 के संकल्प को साकार करने के लिए शैक्षणिक संस्थानों, शोधकर्ताओं और समाज के बीच समन्वय तथा सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने, पर्यावरण संरक्षण, तकनीकी नवाचार और विकास की प्रक्रिया में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने जैसे विषयों को देश की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।

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