सीजफायर के बाद भी नहीं थमा ईरान, परमाणु साइट्स पर फिर शुरू हुआ खतरनाक मिशन… क्या तीसरे विश्व युद्ध की आहट सुनाई दे रही है?

मध्य पूर्व एक बार फिर बारूद के ढेर पर बैठा है। इजराइल और अमेरिका के साथ 12 दिनों की भीषण जंग और सीजफायर के बाद अब ईरान उस मिशन पर लौट चुका है, जिसे रोकने के लिए पूरा पश्चिमी विश्व लामबंद हुआ था—परमाणु कार्यक्रम।

सीजफायर के महज तीन दिन बाद ही अमेरिकी और इजरायली खुफिया एजेंसियों की सैटेलाइट तस्वीरों ने यह पुष्टि कर दी है कि ईरान ने इस्फहान, फोर्दो और नतांज जैसे अपने तीन प्रमुख भूमिगत एटमी केंद्रों पर फिर से काम शुरू कर दिया है। सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए हमले भी ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को नुकसान नहीं पहुंचा पाए। यूरोपियन यूनियन की खुफिया रिपोर्ट भी यही कहती है कि ईरान के पास अब भी 408 किलो संवर्धित यूरेनियम पूरी तरह सुरक्षित है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन घटनाक्रमों के बाद कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कर दिया है कि अगर ईरान अपने परमाणु केंद्रों की निगरानी नहीं करने देगा, तो अमेरिका किसी भी क्षण ईरान पर हमला कर सकता है। ट्रंप ने कहा, “बिना किसी शक और सवाल के। बिल्कुल हमला करेंगे।”

ईरान जिस तीव्रता से अपने एटमी मिशन की ओर लौट रहा है, वह वैश्विक स्तर पर चिंता की वजह बन गया है। अमेरिका ने अल-उदैद एयरबेस (कतर) में फिर से ऑयल टैंकर एयरक्राफ्ट की तैनाती शुरू कर दी है और अमेरिकी नागरिकों को ईरान छोड़ने का आदेश दिया गया है। ये संकेत बताते हैं कि जंग का दूसरा चरण कभी भी शुरू हो सकता है।

इस्फहान की सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि सेंटर का प्रवेश द्वार 27 जून से फिर खुल गया है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि वहां पर काम फिर शुरू हो गया है। फोर्दो सेंटर की तस्वीरों में बंकर बस्टर बम से हुए नुकसान की मरम्मत के लिए भारी मशीनें दिखाई दे रही हैं। वहीं नतांज पर भी गतिविधियां दोबारा सक्रिय हो गई हैं।

अमेरिका द्वारा ईरान पर GBU-57 बंकर बस्टर बम से हमला इसलिए नाकाम रहा क्योंकि यह बम भूमिगत स्तर पर 200 मीटर की गहराई तक नहीं पहुंच पाया। हालांकि फोर्दो और नतांज पर B-2 बॉम्बर्स से यह बम गिराए गए थे, लेकिन रणनीतिक तौर पर ये हमले ईरान के न्यूक्लियर इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह खत्म नहीं कर सके।

सबसे बड़ा संकट यह है कि ईरान ने IAEA (अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) को भी अपने ठिकानों की निगरानी की अनुमति नहीं दी है और माना जा रहा है कि वह जल्द ही परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से भी खुद को अलग कर सकता है।

अब पूरा सवाल इस पर टिका है कि क्या अगला हमला वह चिंगारी बनेगा जिससे तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत हो सकती है? क्या ईरान और अमेरिका के बीच अब सिर्फ बयानबाज़ी नहीं बल्कि सीधा सैन्य टकराव तय है?

इन तमाम सवालों के जवाब आने वाले कुछ ही दिनों में मिल सकते हैं, लेकिन इतना तय है कि एक बार फिर दुनिया एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां एक गलती अरब क्षेत्र को महायुद्ध के मुहाने पर ले जा सकती है।

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