April 18, 2026

संघ बदल चुका है? मनुस्मृति-समर्थन पर मचा घमासान, शशि थरूर के बयान से कांग्रेस में हलचल

देश में चल रही संविधान बनाम मनुस्मृति की बहस अब नया मोड़ ले चुकी है। जहां एक ओर कांग्रेस पार्टी और उसके नेता भाजपा और आरएसएस पर संविधान से छेड़छाड़ के आरोप लगा रहे हैं, वहीं कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक ऐसा बयान दे दिया है जिसने सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। थरूर का कहना है कि “RSS अब शायद उन पुराने विचारों से आगे बढ़ चुका है” और आज वो क्या सोचते हैं, यह वही बता सकते हैं।

यह बयान ऐसे समय आया है जब राहुल गांधी ने साफ आरोप लगाया कि “RSS और भाजपा को संविधान नहीं, बल्कि मनुस्मृति चाहिए।” उन्होंने दत्तात्रेय होसबले के उस बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने संविधान की प्रस्तावना से ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द हटाने का समर्थन किया था। राहुल ने इसे संविधान के मूल ढांचे पर हमला बताया और कहा कि RSS–BJP गरीबों और बहुजनों से अधिकार छीनने की साजिश कर रहे हैं।

लेकिन शशि थरूर का रुख अलग दिखा। उन्होंने कहा कि गोलवलकर जैसे आरएसएस विचारकों ने संविधान में मनुस्मृति का उल्लेख न होने को पहले एक कमी के रूप में देखा था, लेकिन अब शायद संघ उस दौर से आगे निकल चुका है। थरूर ने कहा, “आज आरएसएस क्या सोचती है, वो वही बेहतर बता सकते हैं।”

थरूर का यह बयान उस वक्त आया है जब पूरा विपक्ष भाजपा और संघ पर हमलावर है, और संसद में भी विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे को लेकर एकजुट हैं। ऐसे में कांग्रेस के ही एक वरिष्ठ सांसद की यह संघ के प्रति नरम टिप्पणी पार्टी लाइन से थोड़ा हटकर मानी जा रही है।

1976 में आपातकाल के दौरान संविधान में ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द जोड़े गए थे। अब जब RSS महासचिव दत्तात्रेय होसबले इन्हें “जबरन जोड़े गए” बता रहे हैं, तो यह बहस एक बार फिर इतिहास और विचारधारा की टकराहट को सतह पर ला रही है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शशि थरूर का बयान कांग्रेस की अंदरूनी सोच में बदलाव का संकेत है या फिर यह सिर्फ एक व्यक्तिगत राय है? और क्या इससे पार्टी की सार्वजनिक रणनीति पर असर पड़ेगा? यह आने वाले वक्त में साफ हो जाएगा, लेकिन इतना तय है कि मनुस्मृति बनाम संविधान की बहस अब केवल वैचारिक नहीं रही, यह 2025 की राजनीति का केंद्रीय मुद्दा बन चुकी है।

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