29 साल पहले विलेन बनकर इतिहास रच गई थीं काजोल, इस अवॉर्ड को जीतने वाली बनीं पहली एक्ट्रेस
बॉलीवुड की सबसे दमदार और लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शुमार काजोल ने अपने करियर में हर तरह के किरदार निभाकर खुद को साबित किया है। 90 के दशक में बड़े पर्दे पर कदम रखने वाली काजोल आज भी फिल्मों में सक्रिय हैं और दर्शकों के बीच उतनी ही लोकप्रिय हैं। आमतौर पर रोमांटिक और पारिवारिक भूमिकाओं के लिए पहचानी जाने वाली काजोल ने एक बार ऐसा जोखिम उठाया, जिसने उन्हें इतिहास के पन्नों में दर्ज करा दिया।
काजोल दिग्गज अभिनेत्री तनुजा और दिवंगत निर्माता-निर्देशक शोमू मुखर्जी की बड़ी बेटी हैं। बचपन से ही उन्हें घर में फिल्मी माहौल मिला, जिसका असर उनके करियर पर साफ दिखाई देता है। साल 1992 में फिल्म ‘बेखुदी’ से उन्होंने बॉलीवुड में डेब्यू किया। भले ही उनकी पहली फिल्म बॉक्स ऑफिस पर खास कमाल न दिखा पाई, लेकिन काजोल की प्रतिभा पर इंडस्ट्री की नजर जरूर टिक गई थी।
शुरुआती वर्षों में काजोल ने ‘बाजीगर’, ‘ये दिल्लगी’, ‘करण अर्जुन’ और ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ जैसी फिल्मों से खुद को एक भरोसेमंद स्टार के रूप में स्थापित कर लिया। रोमांटिक हीरोइन की छवि में दर्शकों ने उन्हें खूब पसंद किया, लेकिन काजोल ने खुद को किसी एक दायरे में सीमित नहीं रखा। करियर के शुरुआती दौर में ही उन्होंने निगेटिव रोल निभाने का साहसिक फैसला लिया, जो उस वक्त किसी बड़ी अभिनेत्री के लिए आसान नहीं माना जाता था।
साल 1997 में रिलीज हुई फिल्म ‘गुप्त’ काजोल के करियर का एक अहम मोड़ साबित हुई। इस सस्पेंस थ्रिलर में उन्होंने एक नेगेटिव किरदार निभाया, जिसने दर्शकों को चौंका दिया। फिल्म में उनके साथ मनीषा कोइराला और बॉबी देओल अहम भूमिकाओं में नजर आए थे। खास बात यह रही कि काजोल का किरदार कहानी के सबसे बड़े ट्विस्ट के रूप में सामने आया और उनकी अदाकारी को जमकर सराहा गया।
‘गुप्त’ में विलेन बनकर भी काजोल ने दर्शकों का दिल जीत लिया। इस दमदार प्रदर्शन के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट विलेन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। काजोल यह अवॉर्ड जीतने वाली पहली अभिनेत्री बनीं, जिसने साबित कर दिया कि मजबूत अभिनय के आगे हीरो-हीरोइन या विलेन का भेद मायने नहीं रखता। आज भी काजोल का यह किरदार बॉलीवुड के सबसे यादगार निगेटिव रोल्स में गिना जाता है, जिसने उनके करियर को एक नई ऊंचाई दी।
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