अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) के पूर्व अधिकारी जॉन किरियाकू ने भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों से चले आ रहे तनाव पर एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के पास परमाणु हथियार होने के बावजूद अब तक न्यूक्लियर वॉर नहीं होने के पीछे कई गहरे कारण हैं। जॉन किरियाकू ने एक इंटरव्यू में बताया कि पाकिस्तान बार-बार भारत को उकसाता जरूर है, लेकिन उसे अच्छी तरह पता है कि किसी पारंपरिक युद्ध में भारत से मुकाबला करना उसके लिए नामुमकिन है।
किरियाकू, जो 9/11 हमलों के बाद पाकिस्तान में काउंटर-टेरर ऑपरेशंस के प्रभारी रहे थे, ने कहा कि पाकिस्तान की परमाणु धमकी अब उतनी वास्तविक नहीं रही जितनी पहले थी। उनके अनुसार, पाकिस्तान के नेताओं को यह भलीभांति समझ है कि यदि भारत के साथ युद्ध छिड़ा, तो उनके पास हारने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को भारत से लगातार उलझने से कुछ हासिल नहीं होगा, क्योंकि भारत के पास न केवल मजबूत सैन्य शक्ति है, बल्कि उसकी आर्थिक और कूटनीतिक स्थिति भी बहुत सशक्त है।
इस चर्चा के दौरान उन्होंने यह भी खुलासा किया कि करीब 23 साल पहले, तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने पाकिस्तान के परमाणु हथियारों का नियंत्रण अमेरिका को सौंप दिया था। किरियाकू ने दावा किया कि उस सौदे के बदले अमेरिका ने पाकिस्तान को करोड़ों डॉलर की वित्तीय मदद दी थी। उन्होंने कहा कि उसके बाद से पाकिस्तान भले ही अपनी न्यूक्लियर ताकत का प्रचार करता रहा, लेकिन वास्तव में उस पर उसका सीधा नियंत्रण नहीं रहा। यही कारण है कि पाकिस्तान कभी भी उस स्तर तक नहीं गया, जहां परमाणु संघर्ष की स्थिति पैदा होती।
उन्होंने आगे बताया कि अमेरिका ने अतीत में कई बार भारत और पाकिस्तान दोनों को सख्त चेतावनी दी थी कि अगर दोनों देशों के बीच युद्ध होता है तो वह छोटा और पारंपरिक (गैर-परमाणु) होना चाहिए। किरियाकू के अनुसार, अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से यह संदेश साफ था कि यदि परमाणु हथियारों का इस्तेमाल हुआ, तो उसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा और एशिया का संतुलन पूरी तरह बदल जाएगा।
किरियाकू के इन बयानों के बाद यह बहस फिर से तेज हो गई है कि पाकिस्तान की परमाणु ताकत वास्तव में कितनी स्वायत्त है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका के इस दावे में सच्चाई है, तो दक्षिण एशिया में परमाणु युद्ध का खतरा बीते दो दशकों से सिर्फ एक राजनीतिक दिखावा भर रहा है। वहीं, भारत की रणनीति हमेशा से यह रही है कि वह अपनी सैन्य शक्ति का उपयोग केवल आत्मरक्षा के लिए करे, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता बनी रहे। यह खुलासा ऐसे समय में आया है जब मई 2025 में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की थी, और दोनों देशों के बीच स्थिति युद्ध के बेहद करीब पहुंच गई थी। बावजूद इसके, परमाणु युद्ध नहीं हुआ — और अब शायद यह स्पष्ट है कि ऐसा क्यों नहीं हुआ।
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