दिल्ली के लालकिले के पास 10 नवंबर को हुए कार ब्लास्ट के आरोपी डॉ. उमर नबी के अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े होने के बाद अब सुरक्षा एजेंसियों ने संस्थान पर निगरानी और तेज कर दी है। जांच में सामने आया है कि यह पहला मामला नहीं है जब इस यूनिवर्सिटी का नाम किसी आतंकी गतिविधि से जुड़ा हो। इससे पहले भी कई छात्र आतंकी संगठनों से जुड़े पाए गए हैं।
इंडियन मुजाहिदीन का सक्रिय आतंकी मिर्ज़ा शादाब बेग, जो पिछले 17 सालों से फरार है, भी अल-फलाह इंजीनियरिंग कॉलेज का छात्र रह चुका है। उसने 2007 में बीटेक पूरा किया था और उसी साल अहमदाबाद व सूरत में हुए सीरियल धमाकों में उसकी बड़ी भूमिका सामने आई थी। पढ़ाई के दौरान ही वह धमाकों की प्लानिंग कर रहा था। उसकी लोकेशन लंबे समय से अफगानिस्तान में बताई जा रही है।
शादाब का नाम जयपुर और गोरखपुर धमाकों में भी सामने आ चुका है। 2008 जयपुर ब्लास्ट में उसने रियाज़ और यासीन भटकल को डेटोनेटर और बेयरिंग सप्लाई किए थे, जिनसे IED तैयार हुए थे। वहीं अहमदाबाद धमाकों से लगभग 15 दिन पहले उसने शहर की रेकी कर तीन टीमों के साथ पूरी प्लानिंग की थी। इंजीनियरिंग बैकग्राउंड होने के कारण वह बम बनाने में बेहद माहिर माना जाता था।
लालकिला धमाके के बाद फरीदाबाद के धौज में स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी एक बार फिर से जांच एजेंसियों के रडार पर आ गई है। 2014 में यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने से पहले यह इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में काम करती थी। लंबे समय से फरार शादाब पर 1 लाख रुपये का इनाम घोषित है और 2008 से वह सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ से बाहर है।
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