भारत पर सवाल उठाने वाला ब्रिटेन खुद है दमन का सबसे बड़ा प्रतीक
एक तरफ ब्रिटेन भारत को “दमनकारी देश” बताकर 12 देशों की सूची में शामिल करता है, दूसरी तरफ उसका अपना इतिहास उन अत्याचारों और नरसंहारों से भरा पड़ा है, जो उसने दुनियाभर के देशों में अपने उपनिवेश काल के दौरान किए। भारत ने इस ब्रिटिश रिपोर्ट को एकतरफा और पाखंडी बताया है। आखिर ब्रिटेन कौन-सी नैतिकता से दूसरों को ‘दमन’ का पाठ पढ़ा सकता है, जब उसने खुद करोड़ों लोगों को भूख, युद्ध और अन्याय के रास्ते मौत की नींद सुला दिया?
ब्रिटेन का उपनिवेशवादी इतिहास यह दिखाता है कि उसने 16वीं से 20वीं सदी के बीच लगभग 90 देशों पर हमला किया और 56 देशों को लंबे समय तक गुलाम बनाए रखा। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, मलेशिया, केन्या, नाइजीरिया, साउथ अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और आयरलैंड जैसे तमाम देशों में ब्रिटिश शासन का मतलब था – दमन, शोषण और मानवता की हत्या। इन देशों में अंग्रेजों की नीतियों के कारण हुए नरसंहारों और जनसंहारों की कोई सटीक गिनती आज भी नहीं है।
भारत की बात करें तो 1857 से 1947 के बीच ब्रिटिश दमन ने भारत के करीब 10 करोड़ नागरिकों की जान ली। 1857 की क्रांति को दबाने के लिए गांव-गांव जलाए गए, हजारों क्रांतिकारियों को फांसी दी गई। जलियांवाला बाग हत्याकांड इसका काला उदाहरण है, जहां निहत्थे भारतीयों पर गोलियां बरसाई गईं। वहीं, 1943 में चर्चिल की गलत नीतियों के कारण पड़े बंगाल के अकाल में 30 लाख लोगों की मौत हुई। इसके बावजूद ब्रिटेन ने भारत के हिस्से का अनाज भी अपने सैनिकों को भेज दिया।
ब्रिटेन ने केवल भारत में ही नहीं, बल्कि आयरलैंड, केन्या और अफ्रीका के अन्य देशों में भी अमानवीयता की सारी सीमाएं लांघ दीं। 1845 में आयरलैंड में पड़े अकाल में 10 लाख लोगों की जान चली गई, लेकिन ब्रिटेन वहां से अनाज निर्यात करता रहा। वहीं, 1950 के दशक में केन्या के माउ माउ विद्रोह को कुचलने के लिए ब्रिटिश सेना ने हजारों लोगों को यातनाएं दीं और हत्या कर दी।
भारत जैसे लोकतांत्रिक देश को ‘दमनकारी’ कहना ब्रिटेन के उस दोहरे चरित्र को दर्शाता है, जो आज भी अपने इतिहास की सच्चाई से मुंह मोड़ना चाहता है। भारत अब ऐसा देश नहीं रहा जिसे कोई भी राष्ट्र नैतिकता का उपदेश दे सके। अपने लोकतंत्र, संस्थाओं और मानवाधिकार की रक्षा में भारत का ट्रैक रिकॉर्ड ब्रिटेन से कहीं बेहतर है। यही वजह है कि ब्रिटेन की रिपोर्ट को भारत ने खारिज कर दिया और अपने जवाब में कहा—”दर्पण देखना सीखो।”
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