बारिश के मौसम में ट्रिगर हो सकती है अस्थमा की समस्या, स्वामी रामदेव ने बताए लंग्स की क्षमता सुधारने के उपाय

बरसाती मौसम लोगों के लिए सेहत संबंधी कई समस्याएं लेकर आता है। पूरे देश में लगातार हो रही बारिश और बाढ़ की वजह से न सिर्फ लोगों का सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हो रहा है बल्कि बीमारियों का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। दूषित पानी और गंदे खाने से वायरल फीवर, आई इंफेक्शन, हेपेटाइटिस, डायरिया जैसी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। वहीं दूसरी ओर, नमी और उमस की वजह से सांस की बीमारियां भी गंभीर हो जाती हैं। विशेष रूप से अस्थमा और सीओपीडी से पीड़ित मरीजों को इस मौसम में सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ती है।

अस्थमा से जूझ रहे लोगों के लिए मानसून एक चुनौती भरा समय होता है। नमी के कारण सांस की नली में सूजन, छाती में जकड़न और सांस लेने में कठिनाई बढ़ जाती है। कई बार लंग्स तक सही मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, जिससे मरीज को सांस फूलने और थकान जैसी दिक्कत होती है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि पिछले आठ सालों में सीओपीडी से होने वाली मौतों का आंकड़ा नौ गुना बढ़ा है। ऐसे में डॉक्टर और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ-साथ योगगुरु भी बार-बार इस बात पर जोर देते हैं कि बरसात के मौसम में विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए।

स्वामी रामदेव ने अस्थमा और फेफड़ों से जुड़ी अन्य समस्याओं से बचाव के लिए कुछ प्राकृतिक उपाय बताए हैं। उनके अनुसार, अस्थमा से बचाव के लिए जुकाम से दूर रहना बेहद जरूरी है। इसके लिए गुनगुना पानी पीना, नमक के पानी से गरारे करना और नाक में अणु तेल डालना उपयोगी हो सकता है। इसके अलावा अदरक, लौंग और दालचीनी का काढ़ा पीना या तुलसी, अदरक और काली मिर्च वाली चाय का सेवन करना भी फायदेमंद है। गिलोय का काढ़ा, तुलसी के पत्ते और अनुलोम-विलोम प्राणायाम को रोजाना की दिनचर्या में शामिल करने से अस्थमा के लक्षणों में राहत मिल सकती है।

फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने के लिए योग और प्राणायाम का अभ्यास सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है। रामदेव के अनुसार, हल्दी वाला दूध, त्रिकुटा पाउडर और रात को भाप लेना लंग्स को मजबूत करने में सहायक है। इसके अलावा सरसों के तेल का उपयोग भी लाभकारी है—इसे तलवों पर लगाना, नाभि और नाक में डालना शरीर को अंदर से गर्म रखता है और सांस संबंधी दिक्कतों को कम करता है। वहीं, बादाम, काली मिर्च और शक्कर का मिश्रण दूध के साथ लेने से भी लंग्स की क्षमता को बेहतर बनाया जा सकता है।

बरसात के मौसम में फेफड़ों की सेहत बनाए रखना चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन थोड़ी सी सावधानी और घरेलू उपायों से इससे काफी हद तक बचाव किया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में खुद को बैक्टीरिया, वायरस, फंगस और पोलन से दूर रखना चाहिए। स्वामी रामदेव के बताए प्राकृतिक उपाय न केवल अस्थमा और सीओपीडी जैसी बीमारियों में मददगार हो सकते हैं बल्कि समग्र श्वसन स्वास्थ्य को भी मजबूत कर सकते हैं।

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