दिल्ली हाईकोर्ट ने CAPF जवानों के दुरुपयोग पर जताई कड़ी नाराज़गी, गृह मंत्रालय और BSF से मांगा जवाब
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के जवानों के कथित दुरुपयोग पर गंभीर रुख अपनाते हुए गृह मंत्रालय और सीमा सुरक्षा बल (BSF) को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। अदालत में दाखिल जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि जवानों को देश की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था संभालने के बजाय वरिष्ठ अधिकारियों के निजी कामों में लगाया जा रहा है। यहां तक कि कुछ मामलों में जवानों को आला अधिकारियों के घर पर कुत्तों की देखभाल करने और घरेलू कार्यों में व्यस्त रखा जाता है। इस मुद्दे ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं बल्कि राष्ट्रीय संसाधनों के अनुचित उपयोग को भी उजागर किया है।
यह याचिका BSF के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) संजय यादव ने दायर की है। उन्होंने आरोप लगाया कि जवानों का यह दुरुपयोग ऐसे समय में हो रहा है जब CAPF और असम राइफल्स में 83,000 से अधिक पद खाली पड़े हैं। ऐसे में उपलब्ध जवानों को निजी कार्यों में तैनात करना न केवल बल की कमी को और गहरा करता है बल्कि सीमा सुरक्षा और आंतरिक शांति बनाए रखने की क्षमता पर भी नकारात्मक असर डालता है। यादव ने अपने आवेदन में 21 सितंबर 2016 के एक कार्यालय ज्ञापन का भी जिक्र किया, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि अधिकारियों को सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले विशेषाधिकार, जैसे घर पर जवानों की तैनाती और अन्य सुविधाएं, एक महीने के भीतर समाप्त कर दी जानी चाहिए।
याचिका में यह भी बताया गया कि BSF ने 131 जवानों की एक सूची तैयार की थी, जिन्हें सेवानिवृत्त पुलिस और CAPF अधिकारियों के घरों में काम पर लगाया गया था। लेकिन न तो इन जवानों को वापस बुलाने की कार्रवाई हुई और न ही अधिकारियों से उनके अनधिकृत उपयोग का खर्च वसूला गया। इससे साफ जाहिर होता है कि नियमों की अनदेखी कर जवानों को निजी कामों में व्यस्त किया जा रहा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह प्रथा अब आम हो चुकी है और इससे जवानों की असल जिम्मेदारियां प्रभावित हो रही हैं।
हाईकोर्ट की जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच ने इस मामले पर गंभीर टिप्पणी करते हुए गृह मंत्रालय और BSF को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने कहा कि याचिका में लगाए गए आरोप बेहद संवेदनशील और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हैं, इसलिए सरकार को इस पर स्पष्ट जवाब देना होगा। अदालत ने गृह मंत्रालय और BSF से विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जवानों का उपयोग आखिर किस तरह किया जा रहा है।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर से सुरक्षा बलों के प्रबंधन और उनके संसाधनों के सही उपयोग को लेकर बहस छेड़ दी है। याचिकाकर्ता का कहना है कि जवानों का घरेलू कामों में इस्तेमाल न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है बल्कि यह सार्वजनिक खजाने पर भी अनुचित बोझ डालता है। अब देखने वाली बात होगी कि गृह मंत्रालय और BSF हाईकोर्ट के सामने इस पर क्या पक्ष रखते हैं और जवानों के दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
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