हाथरस में इंसानियत शर्मसार: बच्चों को आम तोड़ने पर पिटबुल-जर्मन शेफर्ड से डराया, वीडियो वायरल, पुलिस जांच में जुटी
उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने न केवल स्थानीय लोगों को हिलाकर रख दिया है बल्कि सोशल मीडिया पर भी लोगों का गुस्सा भड़का दिया है। जिले के गंगागढ़ी गांव में एक बाग के चौकीदार ने आम तोड़ने के आरोप में तीन मासूम बच्चों को पकड़कर उनके आसपास खतरनाक कुत्तों – पिटबुल और जर्मन शेफर्ड – को छोड़ दिया।
बच्चे डर के मारे रोने लगे, कांपते हुए हाथ जोड़कर रहम की भीख मांगते रहे, और इसी दौरान चौकीदार ने उनसे कान पकड़वाकर उठक-बैठक करवाई। यह अमानवीय दृश्य कैमरे में कैद हो गया और अब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
क्या था मामला?
शनिवार दोपहर गंगागढ़ी गांव के तीन मासूम बच्चे खेलते-खेलते पास के एक बाग में पहुंच गए। वहां आम के पेड़ों पर फल देखकर उन्होंने कुछ आम तोड़ने की कोशिश की। इतने में बाग का चौकीदार वहां पहुंचा और बच्चों को पकड़ लिया। बजाय उन्हें समझाने के, चौकीदार ने उनके आसपास अपने दो पालतू खतरनाक कुत्तों को खुला छोड़ दिया, जिससे बच्चे दहशत में आ गए।
डर का मंज़र और बच्चों की हालत
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि बच्चे डर से कांप रहे हैं, रो रहे हैं और हाथ जोड़कर लगातार माफी मांग रहे हैं। चौकीदार की यह क्रूरता बच्चों के मासूम मन पर गहरा असर छोड़ गई। घटना के बाद बच्चे जैसे-तैसे भागकर अपने घर पहुंचे और रोते हुए परिजनों को घटना की जानकारी दी।
पुलिस को दी गई तहरीर, ग्रामीणों में रोष
घटना के बाद परिजन तत्काल अगसौली पुलिस चौकी पहुंचे और लिखित शिकायत दी। गांव के अन्य लोगों ने भी इस बर्बरता के खिलाफ आवाज उठाई और चौकीदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
पुलिस जांच में जुटी, कार्रवाई के संकेत
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो की सत्यता की पुष्टि की जा रही है और प्रथम दृष्टया चौकीदार की हरकत अमानवीय और दंडनीय प्रतीत होती है। यदि आरोप पुष्ट होते हैं, तो आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना न केवल बच्चों के प्रति संवेदनहीनता का परिचायक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कुछ लोगों में ताकत के गलत इस्तेमाल की प्रवृत्ति कितनी खतरनाक हो सकती है। बच्चों को आम तोड़ने पर सजा देने के नाम पर इस तरह डराना न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि नैतिक रूप से भी घोर निंदनीय है। समाज और प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि बच्चों के साथ इस प्रकार का व्यवहार दोबारा न हो – और दोषी को कठोर सजा मिले।
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