लखनऊ में ससुराल की प्रताड़ना से तंग आकर सुपरवाइजर ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, तीन पन्नों का सुसाइड नोट छोड़ा — परिवार और पुलिस में मची सनसनी
लखनऊ के महानगर थाना क्षेत्र में बीते शनिवार को एक दर्दनाक मामला सामने आया, जिसने परिवार और इलाके में हड़कंप मचा दिया। बस्ती शिवधाम, बीरबल साहनी मार्ग निवासी विष्णु कामता प्रसाद (35) ने कथित ससुराली प्रताड़ना से तंग आकर अपने किराए के मकान में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। विष्णु यूपी प्रोजेक्ट कार्पोरेशन में संविदा पर सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत थे और अपनी मां राधारानी के साथ न्यू हैदराबाद इलाके में रह रहे थे।
घटना के पीछे की वजह: ससुराली प्रताड़ना और पारिवारिक तनाव
पुलिस को विष्णु के कमरे से तीन पन्नों का सुसाइड नोट मिला है, जिसमें उन्होंने ससुर, सास और सालों पर बेटी को जबरन अपने पास रखने और मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना देने के आरोप लगाए हैं। विष्णु ने सुसाइड नोट में अपनी बेटी और मां से माफी मांगते हुए लिखा है, “लव यू बिटिया, माफ कर देना…”।
मौके पर पहुंची पुलिस ने बताया कि विष्णु ने पिछले कुछ समय से ससुराल वालों की बदसलूकी और दबाव झेल रहा था, जिससे वह गंभीर मानसिक तनाव में था। वह लगातार अपने घर वालों को परेशान करने की शिकायत करता था।
परिवार की प्रतिक्रिया और अंतिम बातचीत
मां राधारानी ने बताया कि शनिवार सुबह विष्णु ने उनसे कहा था कि वे मंदिर दर्शन के लिए बाहर जाएं। वह घर अकेले था। जब वह वापस लौटीं, तो बेटे का शव फांसी पर लटका मिला। उन्होंने कहा कि विष्णु हमेशा अपने परिवार की जिम्मेदारी निभाने की कोशिश करता था, लेकिन ससुराली समस्याओं ने उसकी जिंदगी को जहन्नुम बना दिया।
परिजन और पड़ोसी घटना से सदमे में हैं। वे प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं ताकि ऐसे हादसे दोबारा न हों।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
महानगर थाना पुलिस ने आत्महत्या की पुष्टि करते हुए कहा कि मामला घरेलू तनाव और मानसिक कष्ट से जुड़ा हुआ है। पुलिस अब सुसाइड नोट के आधार पर ससुराल पक्ष के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई कर रही है।
पुलिस अधीक्षक ने कहा कि वे मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं ताकि पता चल सके कि क्या ससुराल वालों की प्रताड़ना ने विष्णु को आत्महत्या के लिए मजबूर किया। जरूरत पड़ी तो आरोपी पक्ष के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सामाजिक परिप्रेक्ष्य और चेतावनी
यह घटना न केवल एक परिवार के लिए बड़ी त्रासदी है, बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी है कि पारिवारिक हिंसा और मानसिक दबाव कैसे जीवन को छीन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू हिंसा के शिकार व्यक्ति को समय रहते मदद और काउंसलिंग देना जरूरी है ताकि वे आत्महत्या जैसी कदम न उठाएं।
निष्कर्ष
विष्णु कामता प्रसाद की आत्महत्या एक कराहती आवाज़ है, जो ससुराल में व्याप्त प्रताड़ना और घरेलू समस्याओं पर गंभीर ध्यान देने की मांग करती है। प्रशासन और समाज को मिलकर ऐसे मामलों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे ताकि किसी और परिवार को इस तरह की अनर्थकारी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
Share this content:
