स्वामी रामदेव ने थायरॉइड से जूझ रहे लोगों के लिए कुछ प्रभावी योगासन बताएं हैं, जो इस हॉर्मोनल समस्या को कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं। दिल्ली से आई इस हेल्थ रिपोर्ट में बताया गया है कि महिलाएं हॉर्मोनल बदलावों के कारण थायरॉयड की समस्या से अधिक प्रभावित होती हैं। थायरॉयड ग्रंथि हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म, एनर्जी लेवल, हार्ट रेट और मूड को नियंत्रित करती है, और इसके असंतुलित होने पर कई समस्याएं पैदा हो जाती हैं।
थायरॉयड समस्या के प्रमुख कारणों में आयोडीन की कमी, ऑटोइम्यून डिसऑर्डर, अनियमित दिनचर्या और तनाव शामिल हैं। हाइपोथायरॉइड होने पर थकान, वजन बढ़ना और बाल झड़ना जैसे लक्षण दिखते हैं, जबकि हाइपरथायरॉयड में वजन घटना, दिल की धड़कन बढ़ना और तनाव बढ़ जाना जैसे संकेत मिलते हैं। स्वामी रामदेव कहते हैं कि समय पर योगासनों का अभ्यास थायरॉयड को काफी हद तक कंट्रोल कर सकता है।
थायरॉयड में लाभकारी योगासनों में सूर्य नमस्कार सबसे प्रभावी माना जाता है, क्योंकि यह पूरे शरीर में रक्त संचार बढ़ाता है और गर्दन के हिस्से पर हल्का खिंचाव डालकर थायरॉयड ग्रंथि को एक्टिव करता है। भस्त्रिका प्राणायाम में तेज सांसों के जरिए ऑक्सीजन बढ़ती है, जिससे ग्रंथि बेहतर तरीके से काम करती है। कपालभाति पाचन और मेटाबॉलिज्म को तेज करता है, जो हाइपोथायरॉयड में बेहद फायदेमंद है। वहीं सिंहासन से गले की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और थायरॉयड ग्रंथि को प्राकृतिक रूप से उत्तेजना मिलती है।
इन योगासनों का अधिकतम लाभ तभी मिलता है जब इन्हें नियमित रूप से और खाली पेट किया जाए। विशेषज्ञों का कहना है कि थायरॉयड की दवाओं को योग से नहीं बदलना चाहिए, बल्कि योग को सपोर्ट थेरेपी के रूप में अपनाना चाहिए। तनाव कम करना, संतुलित डाइट लेना, अच्छी नींद लेना और समय पर दवा लेना थायरॉयड कंट्रोल में उतना ही जरूरी है जितना योग।
Share this content:
