July 13, 2026

राम के नाम जीवन अर्पण: सरयू तट पर जल समाधि के साथ साकेत वास का सफर तय करेंगे राम विलास वेदांती

भाजपा के वरिष्ठ नेता, राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख सूत्रधार और अयोध्या के पूर्व सांसद डॉ. राम विलास वेदांती का सोमवार को 67 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और मध्य प्रदेश के रीवा जिले के एक अस्पताल में उपचाराधीन थे, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही अयोध्या सहित देशभर में उनके अनुयायियों, संत समाज और राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे लोगों ने उन्हें एक निर्भीक, स्पष्टवादी और रामभक्त संत के रूप में याद किया।

डॉ. राम विलास वेदांती का जीवन अयोध्या और राम के नाम समर्पित रहा। राम जन्मभूमि आंदोलन के शुरुआती दौर से लेकर मंदिर निर्माण की प्रक्रिया तक वे लगातार सक्रिय रहे। आंदोलन के दौरान उनकी आक्रामक शैली, बेबाक बयान और स्पष्ट विचारधारा ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। वे राम मंदिर आंदोलन के नायक रहे अशोक सिंघल के करीबी संतों में गिने जाते थे और कई निर्णायक क्षणों में आंदोलन का नेतृत्व करते नजर आए। उनके समर्थक मानते हैं कि उन्होंने न केवल विचारों से, बल्कि अपने जीवन और कर्म से भी राम मंदिर आंदोलन को दिशा दी।

 

राम मंदिर आंदोलन के दौरान वे ढांचा विध्वंस मामले में आरोपी भी बनाए गए थे। हालांकि बाद में सीबीआई कोर्ट ने उन्हें इस मामले में दोषमुक्त कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर डॉ. वेदांती का रुख हमेशा स्पष्ट रहा। वे सार्वजनिक रूप से कहते थे कि उन्होंने कभी विवादित ढांचे को मस्जिद नहीं माना और उनके अनुसार वह एक मंदिर था। उनका यह भी कहना था कि यदि भव्य और दिव्य मंदिर का निर्माण करना है, तो पुराने ढांचे को हटाना आवश्यक था। उनके ये बयान उन्हें समर्थकों के बीच साहसी संत बनाते थे, तो आलोचकों के लिए विवादास्पद चेहरा भी।

डॉ. राम विलास वेदांती के उत्तराधिकारी शिष्य और उनके मठ के महंत राघवेश दास वेदांती के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार अयोध्या में सरयू नदी के तट पर जल समाधि के रूप में किया जाएगा। यह वही सरयू तट है, जहां से उन्होंने अपने धार्मिक और सामाजिक जीवन की शुरुआत की थी। उनके पार्थिव शरीर को मध्य प्रदेश के रीवा से अयोध्या लाया जा रहा है, जहां अंतिम दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। संत समाज और राम भक्तों के लिए यह क्षण भावुक और ऐतिहासिक माना जा रहा है।

 

राजनीतिक जीवन की बात करें तो डॉ. राम विलास वेदांती ने अयोध्या से सांसद के रूप में भी अपनी भूमिका निभाई। संसद में रहते हुए उन्होंने अयोध्या और राम मंदिर से जुड़े मुद्दों को मुखरता से उठाया। उनके समर्थक उन्हें ऐसे नेता के रूप में याद करते हैं, जिसने संत और सांसद—दोनों भूमिकाओं को एक साथ निभाया। राम के नाम जीवन अर्पण करने वाले डॉ. राम विलास वेदांती अब भौतिक संसार से विदा हो गए हैं, लेकिन अयोध्या, राम मंदिर आंदोलन और उनके विचारों में उनकी उपस्थिति लंबे समय तक महसूस की जाती रहेगी।

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