सिद्धार्थनगर के बराहपुर गांव में विकास के दावे खोखले, सड़क और नाली के अभाव में ग्रामीणों का जीवन बेहाल
सिद्धार्थनगर जिले के मिठवल ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत बराहपुर में विकास के सरकारी दावों की हकीकत जमीनी स्तर पर सवालों के घेरे में है। आज़ादी के कई दशक बीत जाने के बावजूद यह गांव अब भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित नजर आ रहा है। गांव में न तो पक्की सड़क है और न ही नाली व जलनिकासी की कोई ठोस व्यवस्था, जिससे ग्रामीणों को रोजमर्रा के जीवन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि ग्रामीणों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में गांव की स्थिति और भी भयावह हो जाती है। जगह-जगह जलभराव हो जाता है और कई मोहल्लों में घुटनों तक पानी भर जाता है। कीचड़ और गंदे पानी के कारण आवागमन लगभग ठप हो जाता है। गांव की गलियां तालाब में तब्दील हो जाती हैं, जिससे लोगों का घर से निकलना दूभर हो जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक, बारिश के मौसम में हालात ऐसे हो जाते हैं कि बच्चे फिसलकर गिर जाते हैं और बुजुर्गों के लिए बाहर निकलना जोखिम भरा हो जाता है।
गांव में जलभराव का सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। बच्चों को कीचड़ और गंदे पानी से होकर स्कूल जाना पड़ता है, जिससे उनके कपड़े खराब होते हैं और बीमार होने का खतरा भी बना रहता है। वहीं, बीमार बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई बार एंबुलेंस भी गांव के अंदर तक नहीं पहुंच पाती, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।
ग्रामीणों ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उन्होंने कई बार ग्राम प्रधान और संबंधित अधिकारियों से सड़क और नाली निर्माण की मांग की, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला। आरोप है कि जब ग्रामीण विकास कार्यों की बात करते हैं, तो उन्हें धमकाया जाता है। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम प्रधान द्वारा राजनीतिक द्वेष के चलते जानबूझकर गांव की अनदेखी की जा रही है। यहां तक कि विरोध करने पर मारपीट की धमकी देने के आरोप भी लगाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रधान खुलेआम कहते हैं कि चाहे जो कर लो, गांव में कोई काम नहीं होगा।
वहीं, इस पूरे मामले को लेकर जब मिठवल ब्लॉक के खंड विकास अधिकारी सौरभ पांडे से बात करने की कोशिश की गई, तो वह कैमरे के सामने बोलने से बचते नजर आए। हालांकि ऑफ कैमरा उन्होंने इतना जरूर कहा कि यदि ऐसा कोई मामला है तो इसकी जांच कराई जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब गांव के लोग प्रशासन की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी समस्या को गंभीरता से लिया जाएगा।
बराहपुर गांव की यह स्थिति सरकारी योजनाओं और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को साफ तौर पर उजागर करती है। बड़ा सवाल यही है कि प्रशासन कब जागेगा और कब इस गांव के ग्रामीणों को सड़क, नाली और जलनिकासी जैसी बुनियादी सुविधाएं मिल पाएंगी, ताकि वे भी सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन जी सकें।
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