बिहार विधानसभा चुनाव के बीच महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग और नीतीश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि जब राज्य में चुनाव प्रक्रिया चल रही है, तब मुख्यमंत्री उन्नति बेटी योजना के तहत करीब 10 लाख महिलाओं को पैसे बांटे जा रहे हैं। तेजस्वी ने इसे चुनावी रिश्वत करार देते हुए सवाल उठाया कि अगर यह योजना इतनी जरूरी थी, तो पिछले 20 साल में क्यों नहीं लागू की गई? उन्होंने कहा कि यह कदम चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने की कोशिश है।
तेजस्वी यादव ने गुरुवार को कहा, “चुनाव आयोग की नैतिकता कहां गई? 24 अक्टूबर को भी लाखों महिलाओं को पैसा दिया गया। जब चुनाव आचार संहिता लागू है, तब यह पैसा बांटना सीधा-सीधा नियमों का उल्लंघन है।” उन्होंने आरोप लगाया कि एनडीए सरकार वोट पाने के लिए सरकारी योजनाओं का इस्तेमाल कर रही है। तेजस्वी ने कहा कि यह पैसा जनता को मदद के नाम पर रिश्वत के तौर पर दिया जा रहा है। “अभी यह उधार की तरह दिया जा रहा है, चुनाव के बाद ये सूद समेत वापस लिया जाएगा,” उन्होंने तंज कसा।
आरजेडी नेता ने कहा कि यह सिर्फ योजना नहीं बल्कि सत्ता में बने रहने की साजिश है। उन्होंने कहा कि अगर इन लोगों की नीयत सही होती, तो 12 साल से चल रही डबल इंजन सरकार में ये योजनाएं पहले ही लागू की जा सकती थीं। तेजस्वी ने जनता से अपील करते हुए कहा कि बिहार के लोग इस बार बदलाव के लिए वोट दें और “नए बिहार” का निर्माण करें। उन्होंने कहा, “बाहरी लोग बिहार को अपना उपनिवेश बनाना चाहते हैं। अब समय आ गया है कि बिहार अपने हक़ के लिए खड़ा हो।”
तेजस्वी यादव के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। एनडीए की ओर से अब तक इस आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सत्ताधारी दल के नेता इसे विकास योजनाओं के तहत नियमित भुगतान बता रहे हैं। वहीं, चुनाव आयोग पर सवाल उठाने को लेकर भी बहस छिड़ गई है कि क्या वास्तव में सरकार को चुनावी अवधि में ऐसे भुगतान करने की अनुमति होनी चाहिए।
इसी बीच, महागठबंधन ने ‘तेजस्वी प्रण’ शीर्षक से अपना घोषणा पत्र भी जारी किया है, जिसमें कई बड़े वादे शामिल हैं। इनमें हर परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, महिलाओं को 2,500 रुपये मासिक भत्ता और हर घर को 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा किया गया है। तेजस्वी ने कहा कि अगर उनकी सरकार बनी तो बिहार के विकास को एक नई दिशा मिलेगी और सामाजिक न्याय के साथ आर्थिक सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी जाएगी।
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