May 1, 2026

दिल्ली: सत्ता परिवर्तन की साजिश के तहत भड़के थे दंगे, पुलिस ने हलफनामे में किया बड़ा खुलासा

दिल्ली दंगों को लेकर पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल 177 पन्नों के हलफनामे में चौंकाने वाला खुलासा किया है। पुलिस का कहना है कि 2020 में राजधानी में हुई हिंसा कोई अचानक भड़की घटना नहीं थी, बल्कि भारत की संप्रभुता और स्थिरता को कमजोर करने की एक संगठित और योजनाबद्ध कोशिश थी। पुलिस ने इसे एक “सत्ता परिवर्तन अभियान” का हिस्सा बताया है, जिसमें देश के विरोधी तत्वों ने मिलकर राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की साजिश रची थी।

पुलिस के अनुसार, यह हिंसा नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के विरोध की आड़ में सुनियोजित तरीके से भड़काई गई थी। हलफनामे में कहा गया है कि जांच के दौरान जुटाए गए प्रत्यक्षदर्शी और तकनीकी साक्ष्य बताते हैं कि यह हिंसा सांप्रदायिक आधार पर विभाजन पैदा करने के उद्देश्य से रची गई गहरी साजिश थी। पुलिस ने दावा किया कि सीएए के खिलाफ असंतोष को एक ‘हथियार’ की तरह इस्तेमाल किया गया ताकि देश की अखंडता और सरकार की स्थिरता को चुनौती दी जा सके।

दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि यह हिंसा सिर्फ एक शहर या एक घटना तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसका एक व्यापक पैटर्न देशभर में देखने को मिला। हलफनामे में उत्तर प्रदेश, असम, पश्चिम बंगाल, केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि वहां भी इसी तरह की हिंसक घटनाएं देखने को मिलीं, जिससे साबित होता है कि यह एक समन्वित और संगठित प्रयास था। पुलिस का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे देश की शासन व्यवस्था को अस्थिर करने का मकसद छिपा था।

इसके साथ ही, दिल्ली पुलिस ने आरोपियों पर न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करने का भी आरोप लगाया है। पुलिस ने कहा कि कुछ आरोपी सुनियोजित रणनीति के तहत मुकदमे की कार्यवाही में देरी कर रहे हैं ताकि जांच प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सके। हलफनामे में यह भी कहा गया है कि इस तरह का रवैया न केवल अदालत की प्रक्रिया का मजाक उड़ाता है, बल्कि न्याय के रास्ते में भी बाधा डालता है।

इस मामले में पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अधिवक्ता रजत नायर तथा ध्रुव पांडे अदालत में पक्ष रख रहे हैं। गौरतलब है कि फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लेकर शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा भड़क उठी थी। इस हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। अब पुलिस के इस हलफनामे ने एक बार फिर उस दर्दनाक घटना को नई दिशा दे दी है, जिससे पूरे देश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

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