अमेरिकी भंडार में मौजूद संवर्धित यूरेनियम और प्लूटोनियम की मात्रा से वैज्ञानिक और रक्षा विश्लेषक संकेत दे रहे हैं कि अगर आवश्यक नीतिगत और तकनीकी फैसले तुरंत लिए जाएँ तो संयुक्त राज्य कम समय में हजारों वॉरहेड तैयार कर सकता है। हालिया मीडिया रिपोर्टों और खुलासों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि पेंटागन ने राष्ट्रपति के निर्देश के बाद उत्पादन शुरू करने की तैयारियां तेज कर दी हैं।
रूस और चीन की परमाणु गतिविधियों के बढ़ते दायरे के मद्देनज़र अमेरिका ने तीन दशक बाद नए प्रकार के परमाणु हथियारों के उत्पादन पर विचार तेज कर दिया है। वर्तमान उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका के पास करीब 460 टन संवर्धित यूरेनियम है — जिसे औसतन 25 किलो प्रति वॉरहेड की दर से माना जाए तो इससे लगभग 16,000 वॉरहेड बनाए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त लगभग 68 टन प्लूटोनियम भी उपलब्ध है, जिससे करीब 5,000 वॉरहेड तैयार होने का अनुमान है। इन दोनों को मिलाने पर सिद्धांतगत रूप से 20,000 से ज्यादा हथियारों का भंडार तैयार किया जा सकता है।
परमाणु हथियार निर्माण की तकनीकी प्रक्रिया जटिल और बहु-चरणीय होती है। इसके लिए यूरेनियम-235 और प्लूटोनियम-239 जैसे समृद्ध (enriched) आइसोटोपों की आवश्यकता होती है, जिन्हें संवर्धन (enrichment) और पुनर्जनन (reprocessing) जैसे तरीकों से प्राप्त किया जाता है। संवर्धन के लिए सेंट्रीफ्यूज और अन्य उन्नत प्रौद्योगिकियाँ प्रयोग में लाई जाती हैं, जबकि प्लूटोनियम आमतौर पर उच्च-स्तरीय परमाणु रिएक्टर संचालन व पुनःप्रक्रिया के ज़रिये मिलती है। संग्रहित सामग्रियों की मात्राएँ यह दर्शाती हैं कि रणनीतिक विकल्पों के अनुरूप उत्पादन क्षमता को बढ़ाया जा सकता है — बशर्ते राजनीतिक निर्णय और संसाधन उपलब्ध कराए जाएँ।
हालाँकि विश्व समुदाय और कई अंतरराष्ट्रीय संधियाँ — जैसे व्यापक परमाणु परीक्षण निषेध संधि (CTBT) और परमाणु अप्रसार संधि (NPT) — पारंपरिक रूप से नए हथियार निर्माण और परीक्षण पर रोक लगाने के पक्ष में रहीं, पर व्यवहारिक वास्तविकता यह है कि कुछ देशों के पास तकनीकी साधन और कच्चा माल मौजूद होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्टॉकपाइल की उपस्थिति स्वचालित रूप से सक्रिय शस्त्र-निर्माण का संकेत नहीं देती; इसके लिए नीतिगत मंजूरी, इन्फ्रास्ट्रक्चर पुनर्स्थापन और बड़े पैमाने पर संसाधन व्यय की आवश्यकता होती है।
विश्लेषक यह भी चेतावनी देते हैं कि किसी भी देश द्वारा बड़े पैमाने पर हथियार उत्पादन की घोषणा या तैयारी वैश्विक सुरक्षा और निवारक संतुलन को प्रभावित कर सकती है। सैन्य रणनीति, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय दबाव इन फैसलों पर निर्णायक प्रभाव डालते हैं। इसलिए जहाँ रिपोर्टों में उपलब्ध भंडार और संभावित उत्पादन-क्षमता चिंता जगाती है, वहीं असली जोखिम और प्रतिक्रिया का पैमाना इस बात पर निर्भर करेगा कि किन नीतिगत फैसलों के साथ और किस तीव्रता से यह उत्पादन कार्यान्वित किया जाता है।
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