मेघालय की राजधानी शिलांग से लोकसभा सांसद डॉ. रिकी एजे सिंगकोन का 54 वर्ष की उम्र में हार्ट अटैक से निधन हो गया। बताया जा रहा है कि वह इनडोर फुटबॉल मैच खेल रहे थे, तभी अचानक मैदान पर गिर पड़े। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके निधन की खबर से मेघालय के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में शोक की लहर फैल गई है। वे अपने सक्रिय जनसंपर्क और क्षेत्र में मजबूत पकड़ के लिए जाने जाते थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसद के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने अपने शोक संदेश में कहा कि डॉ. सिंगकोन को मेघालय के लोगों की सेवा के प्रति उनके समर्पण के लिए हमेशा याद किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने इस कठिन समय में उनके परिवार, मित्रों और समर्थकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि देश ने एक समर्पित जनप्रतिनिधि को खो दिया है, जिन्होंने जनता के हितों के लिए निरंतर काम किया।
वहीं मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने भी डॉ. सिंगकोन के असमय निधन पर गहरा शोक जताया। उन्होंने उन्हें एक संवेदनशील और समर्पित नेता बताते हुए कहा कि वे अपने लोगों के कल्याण और राज्य के विकास के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने एक ऐसे जननेता को खो दिया है, जिनकी भरपाई करना आसान नहीं होगा। उन्होंने दिवंगत सांसद के परिवार के प्रति अपनी संवेदना प्रकट की और ईश्वर से उन्हें इस दुख को सहने की शक्ति देने की कामना की।
जानकारी के अनुसार, डॉ. सिंगकोन गुरुवार शाम फुटसल यानी इनडोर फुटबॉल मैच में हिस्सा ले रहे थे। खेल के दौरान उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा और वे मैदान पर ही गिर गए। घटना के बाद उन्हें तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों की टीम ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन प्रयास सफल नहीं हो सका। पार्टी पदाधिकारियों ने उनके निधन की पुष्टि करते हुए बताया कि वे नियमित रूप से खेल गतिविधियों में हिस्सा लेते थे और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक थे।
डॉ. रिकी एजे सिंगकोन वॉइस ऑफ द पीपल पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल थे और शिलांग संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे। खासकर खासी-जैंतिया हिल्स क्षेत्र में उनकी जमीनी पकड़ मजबूत मानी जाती थी। स्थानीय मुद्दों को संसद में उठाने और जनता के साथ सीधे संवाद बनाए रखने के कारण वे क्षेत्र में लोकप्रिय नेता के रूप में पहचाने जाते थे। उनके निधन को राज्य की राजनीति के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है, वहीं समर्थकों और आम लोगों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी है।
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