April 30, 2026

काशी की धरोहर पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन, 2014 में पीएम मोदी के प्रस्तावक बनने की अनसुनी कहानी

बनारस संगीत घराने के दिग्गज शास्त्रीय गायक और पद्मविभूषण से सम्मानित पंडित छन्नूलाल मिश्र का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने भारतीय संस्कृति को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी चुनाव के दौरान उनके प्रस्तावक भी बने थे।

बनारस संगीत घराने के दिग्गज और पद्मविभूषण से सम्मानित शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र ने 89 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि अपने अंतिम समय में वे राम धुन गुनगुना रहे थे। पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे छन्नूलाल मिश्र के निधन से संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया और श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन को भारतीय कला और संस्कृति की समृद्धि के लिए समर्पित कर दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में लिखा, “सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने शास्त्रीय संगीत को जन-जन तक पहुँचाने के साथ ही भारतीय परंपरा और संस्कृति को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित किया। यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे सदैव उनका स्नेह और आशीर्वाद मिलता रहा। वर्ष 2014 में वे वाराणसी से मेरे प्रस्तावक भी रहे थे।” पीएम मोदी ने उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना प्रकट की और कहा कि उनका जाना अपूरणीय क्षति है।

जब काशी की धरोहर बने मोदी के प्रस्तावक

वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी जब वाराणसी से लोकसभा चुनाव लड़ने आए, तो उनके मन में यह विचार स्पष्ट था कि यह चुनाव केवल एक राजनीतिक प्रक्रिया न होकर काशी की सांस्कृतिक धरोहर और मां गंगा की आस्था से भी जुड़ा होना चाहिए। उस समय के मेयर रामगोपाल मोहले ने बताया कि मोदी जी चाहते थे कि उनके प्रस्तावक वे लोग बनें, जो काशी की सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत के प्रतीक हों।

इसी सोच के तहत सबसे पहला नाम जो उनके मन में आया, वह था पंडित छन्नूलाल मिश्र का। वे काशी की संगीत परंपरा और आध्यात्मिक धरोहर के प्रतिनिधि माने जाते थे। उनके साथ ही जस्टिस गिरधर मालवीय, मांझी समाज से वीरभद्र निषाद और बुनकर समाज से अशोक कुमार को भी मोदी के प्रस्तावक बनाया गया। चार प्रस्तावकों में से आज केवल अशोक कुमार ही जीवित हैं।

कलेक्टरेट में लिया था आशीर्वाद

रामगोपाल मोहले बताते हैं कि नामांकन के समय नरेंद्र मोदी पंडित छन्नूलाल मिश्र को अपने साथ कलेक्टरेट लेकर गए थे। पर्चा दाखिल करने से पहले उन्होंने उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद भी जब-जब मोदी और पंडित छन्नूलाल की मुलाकात हुई, पीएम ने सदैव उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। यह रिश्ता केवल औपचारिक नहीं बल्कि गहरी आस्था और काशी की संस्कृति से जुड़ाव का प्रतीक था।

संगीत और संस्कृति के सेतु बने छन्नूलाल

पंडित छन्नूलाल मिश्र ने अपने जीवन भर भारतीय शास्त्रीय संगीत और काशी की संस्कृति को जीवित रखने का काम किया। उन्होंने न सिर्फ बनारस संगीत घराने की परंपरा को आगे बढ़ाया, बल्कि विदेशों में भी भारतीय संगीत की ध्वनि गूंजाई। भक्ति और शास्त्रीय गायन के क्षेत्र में उनका योगदान अपार रहा।

उनके निधन से न केवल संगीत प्रेमी बल्कि काशी और भारतीय संस्कृति से जुड़े हर व्यक्ति ने एक धरोहर को खो दिया है। पंडित छन्नूलाल का जीवन भारतीय परंपरा, संगीत और आस्था की गहराई का अद्वितीय उदाहरण है।

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