कतर में भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कमांडर पूर्णेंदु तिवारी की एक बार फिर गिरफ्तारी ने भारत में उनके परिवार की चिंता बढ़ा दी है। दिसंबर 2025 में कतर की एक अदालत के आदेश के बाद उन्हें दोबारा हिरासत में लिया गया, जबकि इससे पहले वे उन सात अन्य पूर्व नौसेना अधिकारियों के साथ रिहा किए गए थे, जो अब सुरक्षित रूप से भारत लौट चुके हैं। विदेश मंत्रालय ने इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए बताया है कि तिवारी की गिरफ्तारी एक पुराने मामले में कोर्ट के फैसले के बाद हुई है और मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है।
पूर्णेंदु तिवारी को अगस्त 2022 में सात अन्य पूर्व भारतीय नौसेना कर्मियों के साथ कतर में हिरासत में लिया गया था। कतर प्रशासन ने उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया था, जिससे पूरे मामले को लेकर शुरुआत से ही कई सवाल खड़े होते रहे। अक्टूबर 2023 में कतर की एक अदालत ने सभी आठों को मौत की सजा सुनाई थी, जिस पर भारत सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी और इसे हैरान करने वाला फैसला बताया था। इसके बाद भारत सरकार के कूटनीतिक प्रयासों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्तक्षेप के चलते फरवरी 2024 में कतर सरकार ने सभी आठ पूर्व नौसेना अधिकारियों को माफी दे दी थी।
माफी के बाद जहां सात अधिकारी भारत लौट आए, वहीं पूर्णेंदु तिवारी को उनके खिलाफ कथित रूप से लंबित आरोपों के चलते कतर में ही रुकने के निर्देश दिए गए। अब दिसंबर में उन्हें दोबारा गिरफ्तार किए जाने की खबर सामने आने के बाद परिवार की उम्मीदें एक बार फिर टूट गई हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारतीय दूतावास लगातार तिवारी और उनके परिजनों के संपर्क में है और मामले पर नजर रखे हुए है, हालांकि न्यायिक प्रक्रिया के कारण इस पर ज्यादा टिप्पणी नहीं की जा सकती।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पूर्णेंदु तिवारी का परिवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक बार फिर सीधे हस्तक्षेप की अपील कर रहा है। परिवार का कहना है कि 65 वर्षीय पूर्व नेवी अधिकारी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं और दोहा की जेल में उनकी हालत लगातार बिगड़ रही है। भारत में उनकी 80 साल की मां रोज बेटे की वापसी की आस लगाए बैठी हैं। परिवार इसे सिर्फ कानूनी मामला नहीं, बल्कि देश के सम्मान और एक पूर्व सैनिक के साथ न्याय का सवाल बता रहा है।
पूर्णेंदु तिवारी की बहन मीतू भार्गव ने आरोप लगाया है कि जिस कंपनी से जुड़ा यह मामला है, उसके शीर्ष अधिकारी ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर पूरे वित्तीय मामले का दोष उनके भाई पर डाल दिया। उनका दावा है कि तिवारी को अलग-थलग रखकर उन पर दबाव बनाया गया और जबरन कुछ कागजात पर हस्ताक्षर कराए गए। परिवार का कहना है कि तिवारी निर्दोष हैं और बिना किसी ठोस सबूत के उन्हें लंबे समय से जेल में रखा गया है। अब एक बार फिर उनकी नजर भारत सरकार और प्रधानमंत्री के कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी हुई है, ताकि वे सुरक्षित रूप से स्वदेश लौट सकें।
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