दिल्ली दंगों के मामलों में लंबे समय से जेल में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज होने के बाद अब इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सीधे तौर पर कांग्रेस को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि जिन कानूनों के तहत आज इन दोनों पर कार्रवाई हो रही है, उन्हें सबसे सख्त बनाने का काम कांग्रेस सरकार के दौरान ही किया गया था, जिसका खामियाजा अब कार्यकर्ताओं को भुगतना पड़ रहा है।
ओवैसी ने आरोप लगाया कि UAPA यानी गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के जिन कड़े प्रावधानों के कारण जमानत मिलना लगभग नामुमकिन हो गया है, वे संशोधन UPA सरकार के समय किए गए थे। उन्होंने खास तौर पर उस दौर का जिक्र किया जब पी. चिदंबरम केंद्रीय गृह मंत्री थे। ओवैसी के अनुसार, उस समय कानून में आतंकवाद की परिभाषा को इतना व्यापक और अस्पष्ट बना दिया गया कि बाद में उसका दुरुपयोग आसान हो गया।
AIMIM प्रमुख ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जमानत न देने के पीछे जिन कानूनी आधारों का उल्लेख किया, वे सभी उन्हीं संशोधनों से जुड़े हैं। उन्होंने संसद में दिए अपने पुराने भाषणों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने पहले ही चेतावनी दी थी कि UAPA की कुछ धाराएं अत्यधिक “व्यक्तिपरक” हैं। ओवैसी के मुताबिक, कानून में इस्तेमाल किए गए शब्द जैसे “किसी भी अन्य माध्यम से” बेहद खतरनाक हैं, क्योंकि इनकी व्याख्या सरकार और एजेंसियां अपने हिसाब से कर सकती हैं।
ओवैसी ने सवाल उठाया कि जब कानून ही इतना कठोर बना दिया गया हो कि वर्षों तक विचाराधीन कैदी जेल में रहें और जमानत न मिल सके, तो इसकी नैतिक जिम्मेदारी किसकी है। उन्होंने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम साढ़े पांच साल से जेल में हैं, लेकिन कांग्रेस के किसी बड़े नेता को आज़ादी के बाद कभी इतनी लंबी अवधि तक जेल में नहीं रहना पड़ा।
अपने बयान के अंत में ओवैसी ने कहा कि आज जो हो रहा है, वह उसी कानून का परिणाम है जिसे कांग्रेस ने बनाया और मजबूत किया था। उन्होंने इसे लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए खतरा बताया और आरोप लगाया कि राजनीतिक असहमति को दबाने के लिए ऐसे कानूनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
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