अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन ने भारत के लिए ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ा एक बड़ा संकेत दिया है। व्हाइट हाउस ने कहा है कि अमेरिका, भारत को वेनेजुएला का कच्चा तेल खरीदने की अनुमति देने के लिए तैयार है, लेकिन यह सौदा पूरी तरह अमेरिकी नियंत्रण और शर्तों के तहत ही होगा। इस फैसले को वैश्विक तेल बाजार और भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते वेनेजुएला का तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में सीमित रूप से ही पहुंच पा रहा था।
अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस्टोफर राइट ने एक साक्षात्कार में बताया कि व्हाइट हाउस इस बात पर सहमत है कि भारत जैसे रणनीतिक साझेदार को वेनेजुएला का तेल खरीदने की इजाजत दी जा सकती है, लेकिन इसके लिए एक “कड़े नियंत्रण वाला ढांचा” तैयार किया जाएगा। उनके मुताबिक, वेनेजुएला से निकलने वाला तेल अमेरिकी सरकार की निगरानी में मार्केट किया जाएगा और उससे होने वाली कमाई भी अमेरिकी नियंत्रण वाले खातों में जाएगी। साफ शब्दों में कहा जाए तो अमेरिका तेल व्यापार को दोबारा शुरू तो करना चाहता है, लेकिन उसकी कमान पूरी तरह अपने हाथ में रखना चाहता है।
गौरतलब है कि अमेरिकी प्रतिबंध लगने से पहले भारत, वेनेजुएला के सबसे बड़े तेल ग्राहकों में शामिल था। भारत की कई रिफाइनरियां खास तौर पर वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल को प्रोसेस करने के लिए डिजाइन की गई थीं। प्रतिबंधों के बाद यह आपूर्ति बंद हो गई थी, जिससे भारत को अपने ऊर्जा आयात में दूसरे विकल्प तलाशने पड़े। अब अगर यह सौदा आगे बढ़ता है, तो भारत को बढ़ती तेल मांग के बीच आयात में विविधता लाने का एक अहम मौका मिल सकता है।
न्यूयॉर्क में आयोजित एक ऊर्जा सम्मेलन में अमेरिकी ऊर्जा मंत्री ने यह भी बताया कि अमेरिका शुरुआती चरण में वेनेजुएला के 30 से 50 मिलियन बैरल तेल का विपणन करने की योजना बना रहा है। इसके बाद भविष्य के उत्पादन से लगातार तेल की बिक्री जारी रखी जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया में अमेरिका खुद को वैश्विक तेल व्यापार में नेतृत्व की भूमिका में देख रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इससे न सिर्फ बाजार में नई आपूर्ति आएगी, बल्कि अमेरिका की रणनीतिक पकड़ भी मजबूत होगी।
इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला को लेकर और भी बड़े दावे किए हैं। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला “बहुत सफल होने जा रहा है” और वहां के तेल क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। ट्रंप ने यह भी ऐलान किया कि अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला में कम से कम 100 अरब डॉलर का निवेश करेंगी। उनका कहना है कि अमेरिका वह सब वापस ले रहा है जो उससे पहले छीन लिया गया था और अब वेनेजुएला के तेल संसाधनों को दोबारा सक्रिय किया जाएगा।
ट्रंप प्रशासन ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वेनेजुएला के तेल क्षेत्र को खोलने के बावजूद उस पर सख्त अमेरिकी नियंत्रण रहेगा। किन कंपनियों को निवेश की इजाजत मिलेगी, इसका फैसला भी वाशिंगटन ही करेगा। वर्षों के प्रतिबंधों, कुप्रबंधन और कम निवेश के चलते वेनेजुएला का तेल उद्योग बुरी तरह कमजोर हो चुका है। अब अमेरिका इस उद्योग को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अपनी शर्तों और रणनीतिक हितों के साथ। ऐसे में भारत के लिए यह अवसर तो है, लेकिन पूरी तरह अमेरिका की तय की गई सीमाओं के भीतर।
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