जयचंद ने घेर लिया होगा… दही-चूड़ा भोज में तेजस्वी के न पहुंचने पर तेज प्रताप का तंज

मकर संक्रांति के अवसर पर बिहार की राजनीति उस वक्त चर्चा के केंद्र में आ गई, जब राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेज प्रताप यादव के बहुचर्चित दही-चूड़ा भोज में उनके छोटे भाई और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव शामिल नहीं हुए। इस कार्यक्रम का आयोजन तेज प्रताप यादव ने अपने आवास पर किया था, जिसमें उन्होंने पक्ष और विपक्ष के कई बड़े नेताओं को व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित किया था। लेकिन तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी ने पूरे आयोजन से ज्यादा सुर्खियां बटोर लीं और इसी को लेकर तेज प्रताप यादव ने मीडिया के सामने तीखा तंज कस दिया।

 

तेज प्रताप यादव ने कहा कि संभव है तेजस्वी यादव को “जयचंद” ने घेर लिया हो, इसलिए वह कार्यक्रम में नहीं आ सके। उन्होंने यह भी कहा कि वह रात नौ बजे तक तेजस्वी यादव का इंतजार करेंगे। मीडिया से बातचीत के दौरान तेज प्रताप ने साफ तौर पर कहा कि मीडिया तेजस्वी यादव से खुद यह सवाल पूछे कि क्या उनका आने का मन था या नहीं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तेजस्वी यादव को कार्यक्रम का निमंत्रण दिया गया था और परिवार की ओर से कोई दूरी बनाने की कोशिश नहीं की गई थी।

 

इस दही-चूड़ा भोज में राजद प्रमुख और उनके पिता लालू प्रसाद यादव की मौजूदगी खास रही। लालू यादव ने कार्यक्रम में पहुंचकर तेज प्रताप यादव को आशीर्वाद दिया, जिसे तेज प्रताप ने अपने लिए बड़ी नैतिक ताकत बताया। इसके अलावा बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख पशुपति कुमार पारस, जदयू के वरिष्ठ नेता और मंत्री अशोक चौधरी, तेज प्रताप के मामा और पूर्व सांसद साधु यादव, प्रभुनाथ यादव सहित कई प्रमुख राजनीतिक चेहरे इस आयोजन में शामिल हुए। हालांकि तेजस्वी यादव और तेज प्रताप की माता राबड़ी देवी की अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

 

तेज प्रताप यादव ने यह भी कहा कि उनकी माता कार्यक्रम में नहीं आईं, लेकिन पिता का आशीर्वाद उनके साथ है और माता-पिता दोनों का आशीर्वाद हमेशा उनके सिर पर रहता है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी ही “असली पार्टी” है और इसी वजह से उनके पिता खुद उन्हें आशीर्वाद देने आए। उन्होंने यह भी कहा कि मंत्री बनना या न बनना दूसरों के हाथ में है, लेकिन उनके मन में भी जिम्मेदारी निभाने की इच्छा है, जैसे कभी उनके पिता ने प्रधानमंत्री बनने की इच्छा जाहिर की थी।

 

इसी बातचीत के दौरान तेज प्रताप यादव ने पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी बयान देकर नया विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होते हैं तो वह ममता बनर्जी के साथ नहीं बल्कि उनके खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। तेज प्रताप ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी इस समय “जयचंद के गिरोह” में हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि चुनाव में हार-जीत चलती रहती है और अगर कोई लगातार जीत रहा है तो उसे हार का सामना भी करना पड़ सकता है। तेज प्रताप ने यह भी जोड़ा कि उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों से राजनीतिक ऑफर मिलते रहते हैं, लेकिन उन्हें स्वीकार करना या नहीं करना पूरी तरह उनका निजी फैसला है और जब भी कोई बड़ा फैसला होगा, उसकी जानकारी सबसे पहले मीडिया को दी जाएगी।

 

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर राजद के अंदरूनी समीकरणों और पारिवारिक रिश्तों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। तेज प्रताप यादव के बयानों से यह साफ हो गया है कि दही-चूड़ा भोज सिर्फ एक पारंपरिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह बिहार की सियासत में आने वाले दिनों के संभावित राजनीतिक संकेतों का मंच भी बन गया है।

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