दिव्यांगों के लिए स्वास्थ्य बीमा और योजनाओं में अनदेखी: सर्वेक्षण में खुलासा, सरकार पर उठे सवाल

भारत में दिव्यांगों के लिए स्वास्थ्य बीमा और सरकार की प्रमुख स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ पहुंचाना अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। एक नए सर्वेक्षण में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि देश के 82 प्रतिशत दिव्यांगों के पास किसी भी प्रकार का बीमा नहीं है। इसके अलावा, 42 प्रतिशत दिव्यांगों को सरकार की आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के बारे में जानकारी तक नहीं है। यह सर्वेक्षण राष्ट्रीय दिव्यांगता नेटवर्क (एनडीएन) द्वारा किए गए एक अध्ययन में सामने आया है, जिसे हाल ही में एक बैठक में प्रस्तुत किया गया। इस बैठक में 20 से अधिक राज्यों के नागरिक समाज समूह और दिव्यांग अधिकार संगठन के सदस्य शामिल हुए थे।

सर्वेक्षण में सामने आई चिंताजनक तस्वीर

नेशनल सेंटर फॉर प्रमोशन ऑफ एम्प्लॉयमेंट फॉर डिसेबल्ड पीपुल (एनसीपीईडीपी) द्वारा आयुष्मान फॉर ऑल अभियान के तहत किए गए सर्वेक्षण में 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 5,000 से अधिक दिव्यांग व्यक्तियों की राय ली गई थी। इस सर्वेक्षण के नतीजे गंभीर रूप से चिंताजनक हैं, जिनमें स्पष्ट रूप से यह दिखाई दिया कि सरकार द्वारा बनाए गए स्वास्थ्य योजनाओं के लाभ से बड़ी संख्या में दिव्यांग लोग वंचित हैं। सर्वेक्षण में यह भी खुलासा हुआ कि आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य हाशिए पर रहने वाली आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन इस योजना का लाभ केवल 28 प्रतिशत दिव्यांगों ने ही लिया है।

स्वास्थ्य देखभाल से वंचित दिव्यांग समुदाय

एनसीपीईडीपी के कार्यकारी निदेशक अरमान अली ने कहा कि यह आंकड़े केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि ये वास्तविक व्यक्तियों की स्थिति को दर्शाते हैं जो आवश्यक स्वास्थ्य देखभाल से वंचित रह गए हैं। उन्होंने बताया कि दिव्यांगों के लिए स्वास्थ्य बीमा एक विशेषाधिकार नहीं, बल्कि जीवनयापन के लिए एक आवश्यक आवश्यकता है। इसके बावजूद, निजी बीमा कंपनियां दिव्यांगों को यह सुविधा देने से इंकार करती हैं, और इसके पीछे मुख्य कारण जागरूकता और बीमा सुविधाओं तक पहुंच की कमी है।

बीमा पर दिल्ली हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

अरमान अली ने बीमा पर दिल्ली हाईकोर्ट के हालिया फैसले का जिक्र करते हुए इसे एक मील का पत्थर बताया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस फैसले के बावजूद बीमा कंपनियां दिव्यांग व्यक्तियों को आवश्यक स्वास्थ्य बीमा सुविधा प्रदान करने से पीछे हट रही हैं। यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि सरकारी फैसलों और न्यायिक आदेशों के बावजूद दिव्यांग समुदाय को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में बड़ी समस्याएं आ रही हैं।

सरकार की नीतियों पर सवाल

अरमान अली ने सरकार की नीतियों पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत योजना में 70 वर्ष से ऊपर के सभी वरिष्ठ नागरिकों को लाभ प्रदान किया जाता है, लेकिन दिव्यांग व्यक्तियों के लिए ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने इसे एक बड़े सामाजिक और आर्थिक असंतुलन की ओर इशारा किया, जहां दिव्यांगता और गरीबी का दुष्चक्र एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। अली ने कहा, “हम केवल योजनाओं की मांग नहीं कर रहे हैं, हम दिव्यांगों के लिए प्रतिनिधित्व और नीतिगत बदलाव की मांग कर रहे हैं।”

बीमा प्राप्त करने में गंभीर समस्याएं

बैठक में विशेषज्ञों ने दिव्यांगों को स्वास्थ्य बीमा प्राप्त करने में आने वाली गंभीर समस्याओं का भी उल्लेख किया। मल्टीपल स्क्लेरोसिस सोसाइटी ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय सचिव संदीप चिटनिस ने बताया कि जब किसी व्यक्ति को दिव्यांगता का पता चलता है, तो बीमा प्राप्त करना लगभग असंभव हो जाता है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगता का पता चलने के बाद बीमा आवेदन सीधे खारिज कर दिए जाते हैं। यह स्थिति दिव्यांगों के लिए एक गंभीर समस्या बन गई है, और इसके समाधान के लिए एक सुलभ और कैशलेस प्रणाली की आवश्यकता है, जो दिव्यांगता के कारण लोगों को दंडित न करे।

सारांश:

यह सर्वेक्षण और बैठक इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि दिव्यांगों को स्वास्थ्य बीमा और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ देने में अभी भी बहुत सारी समस्याएं हैं। इसके बावजूद, कई सरकारी योजनाओं का सही तरीके से कार्यान्वयन और बीमा कंपनियों के बीच बढ़ती जागरूकता का अभाव दिव्यांग समुदाय को जीवनदायिनी स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित कर रहा है। यदि जल्द ही इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया गया, तो दिव्यांग व्यक्तियों की स्थिति में सुधार की संभावना कम होती जाएगी।

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