योग और नेचुरोपैथी को मिलेगी नई पहचान, जल्द बनेगा केंद्रीय कानून!
भारत में योग और नेचुरोपैथी के चिकित्सीय महत्व को अब एक नई दिशा मिलने वाली है। केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने हाल ही में एक विशेष कार्यक्रम में घोषणा की कि सरकार जल्द ही योग और नेचुरोपैथी को राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (NCISM) एक्ट में सम्मिलित करने पर विचार कर रही है। इसके साथ ही, इन दोनों पद्धतियों को अन्य आयुष चिकित्सा पद्धतियों के समकक्ष लाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह घोषणा आयुष मंत्रालय के तहत एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो इन चिकित्सा पद्धतियों को और भी व्यापक रूप से जन सामान्य तक पहुंचाने में मदद करेगा।
योग और नेचुरोपैथी को मिलेगा कानूनी दर्जा
प्रतापराव जाधव ने दिल्ली में एक विशेष बैठक के दौरान यह भी स्पष्ट किया कि सरकार जल्द ही योग और नेचुरोपैथी के लिए केंद्रीय कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू करेगी। यह बैठक योग विशेषज्ञों, संसद सदस्यों और आयुष मंत्रालय के अधिकारियों के बीच हुई, जिसमें इन पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की स्थिति पर विचार-विमर्श किया गया। जाधव ने कहा, “हम योग और नेचुरोपैथी को एक नई पहचान दिलाने के लिए कृतसंकल्प हैं और हम इसे सरकार की प्रमुख आयुष योजनाओं में समाहित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।”
नेचुरोपैथी और योग को आयुष मंत्रालय में अधिकारिक दर्जा
योग और नेचुरोपैथी को आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के तहत आधिकारिक चिकित्सा पद्धतियों के रूप में मान्यता प्राप्त है। ये पद्धतियां 1961 से कैबिनेट सचिवालय के कार्य आवंटन नियमों में शामिल की गई थीं और 1978 में भारत सरकार ने इन पारंपरिक पद्धतियों पर शोध को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय अनुसंधान परिषदों की स्थापना की थी। इसके बाद से योग और प्राकृतिक चिकित्सा (नेचुरोपैथी) के लिए केंद्रीय परिषद (CCRYN) का गठन हुआ, जो इन चिकित्सा पद्धतियों के विकास और मान्यता में सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
क्या है योग और नेचुरोपैथी?
योग और नेचुरोपैथी दोनों ही आयुष मंत्रालय द्वारा मान्यता प्राप्त पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां हैं। योग के जरिए शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर किया जाता है, जबकि नेचुरोपैथी एक प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति है, जो दवाओं के बिना प्राकृतिक तरीकों जैसे आहार, पानी, मल त्याग, धूप और अन्य प्राकृतिक तत्वों का उपयोग करके उपचार करती है। यह पद्धति शरीर को शुद्ध करने और उसकी स्वाभाविक उपचार क्षमता को बढ़ाने पर केंद्रित है।
नेचुरोपैथी को केंद्रीय विनियमन का समर्थन
सर्वेक्षणों और विशेषज्ञों के अनुसार, हालांकि योग और नेचुरोपैथी के चिकित्सकों द्वारा देशभर में अपनी निस्वार्थ सेवाएं दी जा रही हैं, लेकिन अभी तक इन पद्धतियों को कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त नहीं थी। इस पर बात करते हुए, INO (Indian Naturopathy Organization) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनंत बिरादार ने कहा कि अब यह समय है कि योग और नेचुरोपैथी को केंद्रीय विनियमन (Central Regulation) मिले, जिससे इन पद्धतियों को सही दिशा मिले और इनके चिकित्सकों को अधिकारिक पहचान मिले। उन्होंने कहा कि देश भर में हजारों प्राकृतिक चिकित्सक अपनी निस्वार्थ सेवा से लोगों का इलाज कर रहे हैं, लेकिन इन्हें अब तक मान्यता नहीं मिल पाई है।
आयुष मंत्री से समर्थन की उम्मीद
डॉ. अनंत बिरादार ने आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव से अनुरोध किया कि योग और नेचुरोपैथी को राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (NCISM) एक्ट और नेशनल आयुष मिशन (NAM) में सम्मिलित किया जाए। उन्होंने कहा, “यह देश भर से आए नेचुरोपैथी के हितधारकों की एक साझा मांग है, जिसे पूरी तरह से विचार करना चाहिए और इसे मान्यता दी जानी चाहिए।”
नए बदलावों के साथ सशक्त होगी आयुष पद्धतियों की स्वीकार्यता
अगर योग और नेचुरोपैथी को जल्द ही NCISM एक्ट में सम्मिलित किया जाता है, तो इसका लाभ लाखों लोगों को होगा। इससे ना सिर्फ इन चिकित्सा पद्धतियों के चिकित्सकों को अधिकारिक पहचान मिलेगी, बल्कि आम जन के बीच इन पद्धतियों की स्वीकार्यता और प्रभाव भी बढ़ेगा। इस कदम से योग और नेचुरोपैथी को एक मान्यता प्राप्त चिकित्सा पद्धति के रूप में स्थापित किया जा सकेगा, जिससे देश भर में इन पद्धतियों के पालन में वृद्धि हो सकती है।
निष्कर्ष:
योग और नेचुरोपैथी को जल्द ही एक कानूनी दर्जा मिल सकता है, और यह कदम आयुष मंत्रालय के प्रयासों के तहत हो रहा है। इससे भारत में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को एक नई दिशा मिलेगी और इसके चिकित्सकों को मान्यता प्राप्त होगी। यदि यह योजना सफल होती है, तो यह आयुष पद्धतियों को वैश्विक स्तर पर और भी प्रभावी बना सकती है।
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