फुलेरा दूज 2026: पूजा में इन गलतियों से बचें, तभी मिलेगा शुभ फल और घर में आएगी बरकत
19 फरवरी 2026 को मनाया जाने वाला फुलेरा दूज का पर्व प्रेम, सादगी और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को आता है और इसे स्वयंसिद्ध तथा दोषरहित मुहूर्त माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्यों का फल लंबे समय तक बना रहता है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। इसलिए इस दिन विशेष पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों का महत्व काफी बढ़ जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार फुलेरा दूज के दिन घर की उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण की सफाई करना अत्यंत शुभ माना जाता है। सुबह स्नान के बाद मुख्य द्वार पर ताजे फूलों का तोरण लगाना और हल्दी से स्वास्तिक बनाना सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का प्रतीक है। इस दिन भगवान की पूजा कर माखन-मिश्री का भोग लगाने और घर के मंदिर में शुद्ध घी का दीपक जलाने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। नया व्यापार शुरू करने या निवेश करने के लिए भी यह दिन अत्यंत शुभ माना गया है।
हालांकि इस दिन कुछ सावधानियां बरतना भी जरूरी होता है। पूजा के दौरान बासी या मुरझाए फूलों का प्रयोग नहीं करना चाहिए और घर में किसी प्रकार का विवाद या कलह करने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि नकारात्मक व्यवहार से इस शुभ तिथि का प्रभाव कम हो सकता है। इसके अलावा इस दिन मांस, मदिरा या तामसिक भोजन का सेवन भी वर्जित माना गया है, क्योंकि यह आध्यात्मिक शुद्धता में बाधा डालता है।
फुलेरा दूज की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘अबूझ मुहूर्त’ है, जिसमें किसी भी मांगलिक कार्य के लिए अलग से शुभ समय देखने की आवश्यकता नहीं होती। इस दिन जरूरतमंदों को सफेद वस्तुएं जैसे दूध, चावल या चीनी का दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। शाम के समय घर में कपूर जलाने से वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन नियमों का पालन करने से जीवन में खुशहाली, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
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