दिल्ली से सटे नोएडा में उस समय हड़कंप मच गया जब सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के दौरान 12 से अधिक स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी भरे ईमेल मिले। परीक्षा के बीच स्कूल प्रशासन को मेल के जरिए जानकारी दी गई कि परिसर में विस्फोटक रखा गया है। सूचना मिलते ही पुलिस, बम निरोधक दस्ते और स्निफर डॉग्स को मौके पर बुलाया गया और स्कूल परिसरों की गहन तलाशी ली गई। शुरुआती जांच में कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली, लेकिन घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस जांच में सामने आया कि धमकी भरे ईमेल का स्रोत पहले विदेशी सर्वर, खासकर अमेरिका से जुड़ा प्रतीत हुआ। हालांकि तकनीकी जांच के बाद जांच एजेंसियां ग्रेटर नोएडा के बिसरख क्षेत्र तक पहुंचीं, जहां से जुड़े कुछ संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने फर्जी ईमेल आईडी और VoIP नंबर का इस्तेमाल कर धमकी भेजी थी। साथ ही ऑनलाइन बेटिंग रैकेट और इन धमकी भरे ईमेल के बीच संभावित संबंधों की भी जांच की जा रही है।
इस मामले में सूरजपुर थाना में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(4) और 353(4)(b) के साथ आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच के दौरान पुलिस ने चार लैपटॉप, 22 मोबाइल फोन, 16 डेबिट-क्रेडिट कार्ड, दो नेपाली पासपोर्ट समेत कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि साइबर नेटवर्क और इसके पीछे की पूरी साजिश का खुलासा करने के लिए तकनीकी जांच जारी है।
गौरतलब है कि 23 जनवरी को भी नोएडा के करीब 20 स्कूलों को इसी तरह के धमकी भरे ईमेल मिले थे, जिसके बाद बड़े स्तर पर तलाशी अभियान चलाया गया था, लेकिन वह मामला अफवाह निकला था। बार-बार स्कूलों को निशाना बनाए जाने से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जा रहे हैं।
ऐसी परिस्थितियों में स्कूल प्रशासन छात्रों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने, पुलिस को तुरंत सूचना देने और अभिभावकों को स्थिति से अवगत कराने जैसे जरूरी कदम उठाता है। जरूरत पड़ने पर कक्षाएं ऑनलाइन संचालित की जाती हैं या स्कूल अस्थायी रूप से बंद किए जाते हैं। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और सुरक्षा एजेंसियां इस धमकी के पीछे के नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं।
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