July 13, 2026

22.2 करोड़ का जुर्माना और शीर्ष अधिकारियों पर कार्रवाई, इंडिगो पर DGCA की सख्ती से हड़कंप

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो को दिसंबर 2025 में हुए बड़े ऑपरेशनल संकट के मामले में नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) की सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। DGCA की जांच रिपोर्ट में गंभीर खामियां सामने आने के बाद इंडिगो पर 22.2 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाया गया है। इसके साथ ही एयरलाइन के सीईओ को औपचारिक चेतावनी दी गई है, जबकि सीओओ (अकाउंटेबल मैनेजर) को वार्निंग और एसवीपी (OCC) को ऑपरेशनल जिम्मेदारियों से हटाने के निर्देश जारी किए गए हैं।

DGCA की रिपोर्ट के अनुसार, इंडिगो के परिचालन मॉडल में जरूरत से ज्यादा ऑप्टिमाइजेशन किया गया था। क्रू और विमानों के लिए पर्याप्त बैकअप नहीं रखा गया, जिससे थोड़ी सी गड़बड़ी ने पूरे नेटवर्क को प्रभावित कर दिया। इसके अलावा संशोधित फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों को सही तरीके से लागू नहीं किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि क्रू पर अत्यधिक दबाव डाला गया और ड्यूटी घंटों को अधिकतम करने की कोशिश की गई, जिससे सुरक्षा और संचालन दोनों पर असर पड़ा।

जांच में सॉफ्टवेयर और मैनेजमेंट स्तर पर भी गंभीर कमियों की बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, क्रू रोस्टर इस तरह तैयार किए गए थे कि डेड-हेडिंग, टेल स्वैप, लंबी ड्यूटी और न्यूनतम रिकवरी समय पर ज्यादा निर्भरता रही। इससे क्रू को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाया और परिचालन स्थिरता कमजोर हो गई। DGCA ने इसे यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा दोनों के लिहाज से गंभीर चूक माना है।

पूरा मामला दिसंबर 2025 का है, जब इंडिगो को बड़े पैमाने पर उड़ानों में रद्दीकरण और देरी का सामना करना पड़ा था। उस महीने एयरलाइन की 2,507 उड़ानें रद्द हुईं और 1,852 फ्लाइट्स देरी से संचालित हुईं। देश के अलग-अलग एयरपोर्ट पर तीन लाख से ज्यादा यात्री प्रभावित हुए थे। यात्रियों की भारी असुविधा को देखते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) के निर्देश पर DGCA ने चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था।

जांच समिति ने निष्कर्ष निकाला कि संकट के पीछे मुख्य कारण अत्यधिक परिचालन दबाव, अपर्याप्त नियामक तैयारी, सिस्टम और सॉफ्टवेयर सपोर्ट में कमी तथा इंडिगो के मैनेजमेंट स्ट्रक्चर और ऑपरेशनल कंट्रोल में खामियां थीं। DGCA ने साफ संकेत दिया है कि भविष्य में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और एयरलाइनों को सुरक्षा, क्रू वेलफेयर और ऑपरेशनल बफर को प्राथमिकता देनी होगी। इस कार्रवाई को इंडस्ट्री के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।

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