December 7, 2025

दिल्ली ब्लास्ट: पाकिस्तान-बांग्लादेश-UAE-चीन से MBBS करने वाले डॉक्टरों पर शिकंजा, प्राइवेट अस्पतालों से मांगी गई पूरी डिटेल

सुरक्षा एजेंसियों ने बढ़ाई निगरानी, व्हाइट कॉलर मॉड्यूल की साजिश को तोड़ने के लिए कड़ी कार्रवाई

दिल्ली ब्लास्ट के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं और पूरे नेटवर्क को पकड़ने के लिए तेज़ी से कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में दिल्ली पुलिस ने राजधानी के सभी निजी अस्पतालों को नोटिस जारी कर उन विदेशी डॉक्टरों की विस्तृत जानकारी मांगी है, जिन्होंने पाकिस्तान, बांग्लादेश, UAE और चीन जैसे देशों से MBBS की पढ़ाई की है। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि जांच एजेंसियों को संदेह है कि ब्लास्ट में शामिल व्हाइट कॉलर मॉड्यूल ने देश के विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में घुसपैठ की हो सकती है। जांच के दौरान कई संदिग्ध लिंक सामने आए हैं, जिनमें विदेशों से पढ़कर आए लोगों पर भी नजर रखने की जरूरत बताई गई है।

जांच अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने सभी प्राइवेट अस्पतालों को निर्देश दिया है कि वे अपने यहां प्रैक्टिस कर रहे ऐसे डॉक्टरों की पहचान और दस्तावेज तुरंत उपलब्ध कराएं, जिन्होंने अपनी MBBS की डिग्री उपरोक्त चार देशों से हासिल की है। यह जानकारी सुरक्षा एजेंसियों की उस बड़ी स्क्रीनिंग प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके जरिए संभावित संदिग्ध तत्वों की गतिविधियों का विश्लेषण किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि हालिया जांच में ब्लास्ट के तार पाकिस्तान और तुर्की से जुड़े पाए गए हैं, जिसके बाद सतर्कता और बढ़ा दी गई है। एजेंसियों को आशंका है कि इस तरह की घटनाओं को अंजाम देने के लिए उच्च शिक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम लोगों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। हरियाणा नंबर प्लेट वाली एक ह्यूंडई i20 कार में हुए इस धमाके के बाद घटना स्थल पर अफरा-तफरी मच गई। शाम करीब 6:52 बजे हुए इस विस्फोट में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 20 से अधिक लोग अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं। LNJP अस्पताल में उपचाराधीन घायलों में कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। विस्फोट की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कार के साथ आसपास खड़े छह अन्य वाहन, दो ई-रिक्शा और एक ऑटो पूरी तरह जलकर राख हो गए। नजदीक की दुकानें और इमारतें भी क्षतिग्रस्त हो गईं।

दिल्ली ब्लास्ट के बाद सुरक्षा तंत्र ने ऐसे सभी नेटवर्कों पर निगरानी बढ़ा दी है, जिनके जरिए वैचारिक, वित्तीय या तकनीकी सहयोग मिलने की आशंका हो सकती है। खास रूप से उन व्यक्तियों की स्क्रीनिंग हो रही है जो विदेश में पढ़ाई कर भारत लौटे हैं और संवेदनशील क्षेत्रों में कार्यरत हैं। पुलिस द्वारा मांगी गई अस्पतालों की जानकारी भी इसी सघन जांच का हिस्सा है। एजेंसियां इस संभावना का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं व्हाइट कॉलर मॉड्यूल ने चिकित्सा क्षेत्र या अन्य पेशेवर समूहों के बीच अपनी पैठ तो नहीं बनाई।

जांच अधिकारियों का कहना है कि यह कदम किसी विशेष वर्ग को निशाना बनाने का प्रयास नहीं है, बल्कि सुरक्षा सुनिश्चित करने की एक व्यापक प्रक्रिया है। लगातार मिल रही खुफिया जानकारी से यह आशंका बढ़ी है कि आतंकी मॉड्यूल भारत में उच्च शिक्षित प्रोफेशनल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो बिना शक पैदा किए आसानी से नेटवर्क खड़ा कर सकते हैं। ऐसे में विदेश से डिग्री लेकर आए डॉक्टरों की पहचान, दस्तावेज और गतिविधियों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है, ताकि किसी भी संदिग्ध लिंक को समय रहते पकड़ा जा सके। दिल्ली पुलिस और राष्ट्रीय एजेंसियां इस घटना को हल करने और भविष्य में ऐसी किसी भी साजिश को नाकाम करने के लिए दिन-रात अभियान चला रही हैं।

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