December 7, 2025

अमेरिका में इमिग्रेशन पर ट्रंप की सख्ती: थर्ड वर्ल्ड देशों पर लगा बड़ा प्रतिबंध, अब US जाना होगा ‘सपना’

व्हाइट हाउस अटैक के बाद बड़ा फैसला, 19 देशों पर ट्रैवल बैन और ग्रीन कार्ड की कड़ी समीक्षा शुरू

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस के पास हुए हालिया अटैक के बाद इमिग्रेशन पॉलिसी में बड़ा और कड़ा बदलाव लागू कर दिया है। ट्रंप ने घोषणा की कि वे सभी ‘थर्ड वर्ल्ड’ देशों से आने वाले माइग्रेशन को स्थायी रूप से रोक देंगे। उनका कहना है कि इन देशों से आ रहा प्रवास अमेरिका की प्रगति, सुरक्षा और संसाधनों पर बोझ बन रहा है। इस फैसले के बाद उन देशों के लाखों लोगों के लिए अमेरिका की यात्रा, नौकरी या ग्रीन कार्ड का सपना लगभग नामुमकिन हो सकता है। ट्रंप ने तर्क दिया कि मौजूदा इमिग्रेशन पॉलिसी ने अमेरिका की तकनीकी और आर्थिक क्षमता कमजोर कर दी है।

ट्रंप ने अपने Truth Social पोस्ट में सीधे बाइडेन प्रशासन पर हमला किया और दावा किया कि “मिलियन्स ऑफ बाइडेन इलिगल एडमिशन्स” ने अमेरिकी सिस्टम को डैमेज किया है। उनका कहना है कि वे ऐसे सभी लोगों को देश से बाहर करना चाहते हैं जो अमेरिका के लिए लाभकारी नहीं हैं या जिनमें अमेरिकी मूल्यों के प्रति सम्मान नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कोई भी विदेशी नागरिक, जिसे सुरक्षा जोखिम, सार्वजनिक बोझ या “पश्चिमी सभ्यता से असंगत” माना जाता है, उसे देश में रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। यह बयान ट्रंप की पुरानी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की वापसी की ओर संकेत करता है, जो विभिन्न देशों से आने वाले लोगों को प्रभावित कर सकती है।

थर्ड वर्ल्ड देशों की अवधारणा को लेकर भी ट्रंप की टिप्पणी विवाद का विषय बन गई है। यह वर्गीकरण कोल्ड वॉर के दौरान बना था, जब दुनिया को तीन हिस्सों में बांटा गया था— फर्स्ट वर्ल्ड (अमेरिकी सहयोगी, विकसित राष्ट्र), सेकंड वर्ल्ड (सोवियत संघ और उसके सहयोगी) और थर्ड वर्ल्ड (अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के वे देश जो किसी भी ब्लॉक से जुड़े नहीं थे)। हालांकि समय के साथ यह शब्द अविकसित या गरीब देशों के लिए इस्तेमाल होने लगा। इसी वर्गीकरण का हवाला देकर ट्रंप ने उन देशों पर प्रतिबंध लगाने की बात कही है, जहां से आने वाले लोगों को उन्होंने अमेरिका के लिए “खतरा” बताया।

इसी बीच, ग्रीन कार्ड धारकों पर भी ट्रंप प्रशासन ने कड़ी नजर रखने का फैसला किया है। अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) के निदेशक जोसेफ एडलो ने आदेश दिया है कि अफगानिस्तान और अन्य 18 देशों के नागरिकों के ग्रीन कार्ड की पूरी, गहन और कड़ी समीक्षा की जाएगी। यह समीक्षा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ट्रंप प्रशासन मानता है कि इन देशों से आने वाले कई लोग सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकते हैं। 28 नवंबर को जारी इस आदेश के बाद चिंता बढ़ गई है कि भविष्य में लाखों ग्रीन कार्ड होल्डर्स अपनी कानूनी स्थिति खो सकते हैं।

ट्रंप के जून 2025 के कार्यकारी आदेश में जिन 19 देशों को ‘उच्च जोखिम वाले देश’ घोषित किया गया था, उनमें से 12 देशों पर पूर्ण यात्रा प्रतिबंध लागू है—अफगानिस्तान, म्यांमार, चाड, कांगो-ब्राजाविल, इक्वेटोरियल गिनी, इरिट्रिया, हैती, ईरान, लीबिया, सोमालिया, सूडान और यमन। इन देशों के लगभग सभी नागरिकों का अमेरिका में प्रवेश पूरी तरह रोक दिया गया है। इसके अलावा सात और देशों—बुरुंडी, क्यूबा, लाओस, सिएरा लियोन, टोगो, तुर्कमेनिस्तान और वेनेजुएला—पर आंशिक ट्रैवल प्रतिबंध लगाया गया है। यह फैसला न सिर्फ इन देशों के छात्रों, कामगारों और शरणार्थियों को प्रभावित करेगा, बल्कि दुनिया भर में अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम पर एक नई बहस को जन्म दे रहा है।

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