अरुणाचल प्रदेश: अवैध धार्मिक ढांचे पर विवाद के बीच APIYO और मौलाना की बहस का वीडियो वायरल
अरुणाचल प्रदेश में कथित अवैध धार्मिक ढांचों को लेकर आदिवासी संगठनों का आंदोलन एक बार फिर चर्चा में है. अरुणाचल प्रदेश इंडिजिनस यूथ ऑर्गनाइजेशन (APIYO) लंबे समय से उन निर्माणों के खिलाफ अभियान चला रहा है, जिन्हें वह अनधिकृत और आदिवासी भूमि अधिकारों के लिए खतरा मानता है. संगठन का कहना है कि ऐसे ढांचे न सिर्फ जमीन पर कब्जे को बढ़ावा देते हैं, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक विरासत को भी चुनौती देते हैं. इसी पृष्ठभूमि में एक नया वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने इस संवेदनशील मुद्दे को और गरमा दिया है.
वायरल वीडियो कथित तौर पर एक अवैध मस्जिद के पास शूट किया गया है. वीडियो में APIYO के महासचिव तापोर मेयिंग और अध्यक्ष तारो सोनम लियाक मौलाना से सवाल-जवाब करते दिखाई देते हैं. बहस तब शुरू होती है जब APIYO के सदस्य मौलाना से ‘भारत माता की जय’ बोलने को कहते हैं, और वह इस नारे को बोलने से इनकार कर देता है. मौलाना शांत लहजे में ‘भारत जिंदाबाद’ कहकर अपना रुख व्यक्त करता है, लेकिन ‘भारत माता की जय’ बोलने से मना कर देता है. इस इनकार के बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो जाती है, और वीडियो में माहौल लगातार तनावपूर्ण होता जाता है.
वीडियो के एक हिस्से में तारो सोनम लियाक मौलाना की देशभक्ति पर सवाल उठाते हुए एक विवादित टिप्पणी करते सुने जाते हैं—“हर मुसलमान आतंकवादी नहीं होता, लेकिन हर आतंकवादी मुसलमान क्यों होता है?” इस बयान ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है. APIYO के अन्य सदस्य भी मौलाना से बार-बार ‘भारत माता की जय’ कहने का आग्रह करते हैं, लेकिन मौलाना शांतिपूर्ण तरीके से सिर्फ ‘भारत जिंदाबाद’ तक ही सीमित रहता है. इस दौरान और भी युवा वहां पहुंचकर नारेबाजी शुरू कर देते हैं, जिससे स्थिति और गर्म हो जाती है.
इस पूरे वीडियो की टाइमिंग और इसकी वास्तविक परिस्थिति को लेकर अभी तक कोई पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है. स्थानीय प्रशासन ने भी इस वायरल क्लिप पर कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया है. इससे अटकलें और विवाद बढ़ते जा रहे हैं. राज्य में यह मुद्दा सिर्फ अवैध निर्माण बनाम सांस्कृतिक अधिकार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रवाद और धार्मिक अभिव्यक्ति के टकराव का रूप लेता दिखाई दे रहा है.
सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो को लेकर बंटे हुए नजर आ रहे हैं. कुछ लोग APIYO के रुख का समर्थन करते हुए इसे आदिवासी भूमि और संस्कृति की रक्षा से जोड़ रहे हैं. वहीं, कई लोग मौलाना की स्थिति का पक्ष लेते हुए इसे धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति का मामला मान रहे हैं. कुछ उपयोगकर्ता यह भी कह रहे हैं कि किसी से जबरन नारा लगवाना संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है.
APIYO का दावा है कि उनका उद्देश्य सिर्फ अवैध निर्माणों को हटवाना है, लेकिन वीडियो में हुई बहस ने मुद्दे को पूरी तरह दूसरी दिशा दे दी है. कई स्थानीय विश्लेषक इसे अरुणाचल में बदलती सामाजिक स्थितियों और बाहरी प्रभावों के बढ़ते दबाव से जोड़कर देख रहे हैं. कुल मिलाकर, यह वीडियो राज्य में पहले से चले आ रहे विवाद को एक बार फिर राष्ट्रीय मंच पर ले आया है, और फिलहाल इस पर बहस कम होने के संकेत नहीं दिख रहे.
Share this content: