नई दिल्ली: हर 10 में से 1 व्यक्ति को है क्रॉनिक किडनी डिजीज, ज्यादातर को नहीं होता पता
दुनियाभर में तेजी से बढ़ रही क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) अब एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट बन चुकी है। द लैंसेट में प्रकाशित Global Burden of Diseases 2023 रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में लगभग 78 करोड़ लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं, यानी हर 10 में से एक व्यक्ति को यह रोग है। चिंताजनक बात यह है कि अधिकांश लोगों को इसके बारे में पता ही नहीं चलता। भारत में ही करीब 13.8 करोड़ मरीज CKD से पीड़ित हैं, जिससे देश दुनिया में दूसरे स्थान पर है।
यह बीमारी तब होती है जब किडनी धीरे-धीरे शरीर से टॉक्सिक पदार्थों को फिल्टर करने की क्षमता खोने लगती है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसके प्रमुख कारणों में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, खराब खानपान और प्रदूषण शामिल हैं। लंबे समय तक शुगर या ब्लड प्रेशर बढ़े रहने से किडनी की नसें और फिल्टर कमजोर हो जाते हैं। शुरुआती लक्षण जैसे थकान, चेहरे या पैरों में सूजन, भूख कम लगना या पेशाब में झाग आना, अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती जाती है।
इसे “साइलेंट किलर” कहा जाता है क्योंकि शुरुआती चरण में कोई गंभीर लक्षण नहीं दिखते। आमतौर पर किडनी की 60 से 70 फीसदी क्षमता खत्म होने के बाद ही बीमारी पकड़ में आती है। यही वजह है कि कई मरीजों को तब तक पता नहीं चलता जब तक डायलिसिस या ट्रांसप्लांट की नौबत न आ जाए। विशेषज्ञों के अनुसार, लोगों में जागरूकता की कमी और रूटीन किडनी जांच न कराना इस बीमारी के फैलाव की सबसे बड़ी वजह है।
स्टडी में यह भी कहा गया है कि डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर से ग्रस्त लोगों को नियमित रूप से ब्लड और यूरिन टेस्ट करवाने चाहिए, ताकि बीमारी शुरुआती स्तर पर ही पकड़ी जा सके। रिपोर्ट ने दुनियाभर में रूटीन किडनी स्क्रीनिंग को अनिवार्य करने की सिफारिश की है, ताकि समय रहते इलाज शुरू किया जा सके और गंभीर परिणामों से बचा जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, CKD से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना। इसमें ब्लड प्रेशर और शुगर की नियमित जांच, संतुलित और कम नमक वाली डाइट, पर्याप्त पानी पीना, धूम्रपान और शराब से परहेज करना शामिल है। साथ ही, परिवार में यदि किसी को किडनी की समस्या रही हो तो नियमित किडनी फंक्शन टेस्ट करवाना बेहद जरूरी है। नियमित व्यायाम और वजन नियंत्रण से भी किडनी की कार्यक्षमता को लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखा जा सकता है।
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