उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले के कमालगंज क्षेत्र में खनन माफियाओं का बोलबाला लगातार बढ़ता जा रहा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यहां रातों-रात अवैध मिट्टी खनन का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह सब खनन विभाग और थाना पुलिस की मिलीभगत से हो रहा है, जिसके चलते प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही।
जानकारी के मुताबिक, माफिया टाटा बहरामपुर क्षेत्र से मिट्टी निकालकर नसरतपुर गांव में बड़े पैमाने पर डंपिंग कर रहे हैं। ट्रैक्टर और हाइवा वाहनों से मिट्टी का परिवहन रात के अंधेरे में किया जाता है ताकि कोई पकड़ में न आए। यह अवैध खनन न सिर्फ सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा रहा है बल्कि पर्यावरण और स्थानीय किसानों की जमीन को भी बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार खनन अधिकारी और थाना पुलिस को शिकायत दी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उल्टा शिकायत करने वालों को डराने-धमकाने की कोशिश की गई। लोगों का आरोप है कि स्थानीय पुलिस चौकी पर ‘मासिक वसूली’ तय कर दी गई है, जिसके बाद माफिया बिना रोकटोक खनन करते हैं।
स्थिति यह है कि अब इलाके के खेतों और रास्तों पर गड्ढे बन चुके हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। स्थानीय नागरिकों ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक फर्रुखाबाद से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और इसमें शामिल खनन माफिया, पुलिसकर्मियों और विभागीय अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि अवैध खनन पर जल्द रोक नहीं लगी तो वे जन आंदोलन शुरू करने को मजबूर होंगे। फिलहाल, प्रशासन की चुप्पी और अधिकारियों की मौन सहमति ने खनन माफियाओं के हौसले बुलंद कर दिए हैं और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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