दिल्ली के आरएमएल हॉस्पिटल की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सलोनी चड्ढा के मुताबिक, पीरियड्स के दौरान हर महिला को कुछ हद तक दर्द महसूस होता है, लेकिन कुछ महिलाओं में यह दर्द असहनीय हो जाता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इस दौरान शरीर में प्रोस्टाग्लैंडिन नामक हार्मोन बनता है, जो गर्भाशय की मांसपेशियों को सिकुड़ने में मदद करता है. जब यह हार्मोन अधिक मात्रा में बनने लगता है, तो मसल्स की सिकुड़न बढ़ जाती है और इसी वजह से पेट में तेज दर्द या ऐंठन महसूस होती है.
डॉ. चड्ढा बताती हैं कि जिन महिलाओं को फाइब्रॉएड्स या सिस्ट की समस्या होती है, उनमें यह दर्द और ज्यादा बढ़ सकता है. साथ ही अगर महिला तनाव में रहती है, तो शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे दर्द और बढ़ सकता है. ऐसे मामलों में दर्द कई दिनों तक बना रह सकता है और यह सामान्य दिनचर्या को भी प्रभावित करता है.
एक्सपर्ट का कहना है कि अगर दर्द के साथ भारी ब्लीडिंग, उल्टी, चक्कर या बुखार जैसी समस्या हो रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. राहत के लिए महिलाएं पेट पर हीटिंग पैड का इस्तेमाल करें, गुनगुना पानी पिएं, हरी सब्जियां और फल आहार में शामिल करें और पर्याप्त नींद व मानसिक शांति बनाए रखें. इससे दर्द में काफी हद तक राहत मिल सकती है.
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