अमेरिका: ईरान को ट्रंप की खुली धमकी, बड़ा सैन्य दस्ता रवाना, डील नहीं हुई तो भुगतने होंगे गंभीर परिणाम
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सीधी और खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि अमेरिका ने ईरान की दिशा में बड़ा सैन्य दस्ता और बड़ी संख्या में युद्धपोत रवाना कर दिए हैं। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि अब ईरान के पास ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं और उसे हर हाल में अमेरिका के साथ डील करनी होगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर ईरान ने डील से इनकार किया तो उसे इसके गंभीर और दूरगामी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान को डील के लिए एक डेडलाइन भी तय कर दी है, जिसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। उन्होंने दावा किया कि यह समयसीमा सिर्फ ईरान को पता है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि वेनेजुएला की ओर भी सैन्य दस्ता भेज चुका है। उनके इस बयान को अमेरिकी विदेश नीति में आक्रामक रुख के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
इस बीच ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा है कि अगर अमेरिका ने किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई की, तो ईरान उसका करारा जवाब देगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने दावा किया है कि ईरानी सेना जल, थल और नभ तीनों मोर्चों पर जवाबी हमले के लिए पूरी तरह तैयार है। वहीं ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकिर कालीबाफ ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी हमले की कीमत ट्रंप को भारी पड़ सकती है।
तनाव को और बढ़ाने वाली बात यह है कि उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन खुलकर ईरान के समर्थन में सामने आ गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, किम जोंग उन ने अमेरिका के खिलाफ परमाणु मोर्चा खोलने तक की चेतावनी दी है। माना जा रहा है कि रूस और चीन भले ही पर्दे के पीछे ईरान का समर्थन कर रहे हों, लेकिन उत्तर कोरिया खुलकर खामेनेई के साथ खड़ा नजर आ रहा है। इससे अमेरिका के लिए स्थिति और जटिल हो गई है।
इसी बीच उपग्रह तस्वीरों में ईरान के दो प्रमुख परमाणु ठिकानों पर हलचल देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गतिविधि इस ओर इशारा कर सकती है कि ईरान अपने उन परमाणु ठिकानों को फिर से सक्रिय करने की कोशिश कर रहा है, जिन्हें पहले हुए अमेरिकी या इजराइली हमलों में नुकसान पहुंचा था। इन घटनाक्रमों ने पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध की आशंका को और गहरा कर दिया है।
कुल मिलाकर, ट्रंप की धमकी, ईरान का जवाबी तेवर और उत्तर कोरिया का खुला समर्थन अंतरराष्ट्रीय राजनीति को बेहद संवेदनशील मोड़ पर ले आया है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह तनाव किसी कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ता है या फिर दुनिया एक बड़े सैन्य टकराव की ओर कदम बढ़ा रही है।
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