उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की मौजूदगी में भाजपा नेताओं के बीच हुई हाथापाई ने पार्टी की छवि को झटका दिया है। यह विवाद गोसाईंगंज के पूर्व विधायक इंद्र प्रताप तिवारी, जिन्हें खब्बू के नाम से जाना जाता है, की मां के निधन पर आयोजित शांति भोज के दौरान हुआ। उपमुख्यमंत्री मौर्य श्रद्धांजलि अर्पित करने कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे थे, तभी यह अप्रत्याशित घटनाक्रम घटित हुआ।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भाजपा जिला अध्यक्ष संजीव सिंह और पार्टी नेता सच्चिदानंद पांडे के बीच पहले बहस हुई, जो देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई। दोनों नेताओं ने सबके सामने धक्का-मुक्की शुरू कर दी और कार्यक्रम की मर्यादा पूरी तरह से प्रभावित हुई। स्थिति इतनी बिगड़ी कि उपमुख्यमंत्री के सुरक्षाकर्मी हस्तक्षेप करने के लिए मजबूर हुए।
स्थानीय लोगों ने बताया कि दोनों नेता “स्कूल के बच्चों की तरह” एक-दूसरे पर हाथ उठाते नजर आए। इस घटना के दौरान कार्यक्रम में मौजूद अन्य लोग स्तब्ध रह गए। कई लोगों ने इस झड़प को अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया, और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वायरल वीडियो ने इस मामले को व्यापक सार्वजनिक चर्चा का विषय बना दिया।
विशेष रूप से इस घटना ने पार्टी की अंदरूनी छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सच्चिदानंद पांडे ने इससे पहले बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा था, जिससे राजनीतिक गलियारों में उनकी पहचान और विवाद दोनों ही चर्चा का हिस्सा बन गए हैं। भाजपा के नेताओं के बीच यह टकराव पार्टी नेतृत्व के लिए भी चिंता का विषय बन गया है।
सुरक्षा और व्यवस्था बहाल करने के बावजूद, उपमुख्यमंत्री के सामने हुई यह झड़प कार्यक्रम की गरिमा को चोट पहुंचाने के लिए काफी थी। कई राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने भाजपा की छवि को असहज स्थिति में डाल दिया है और पार्टी के लिए यह दीर्घकालीन चुनौती बन सकती है।
अब सवाल यह उठता है कि इस घटना के बाद भाजपा नेतृत्व किस तरह कदम उठाता है और पार्टी के अंदरूनी संघर्ष को कैसे नियंत्रित करता है। आगामी दिनों में इस विवाद पर राजनीतिक और मीडिया चर्चा तेज होने की संभावना है।
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