बिना सैलरी के भी अरबों की कमाई, FY25 में भारतीय दिग्गज कारोबारियों ने डिविडेंड और बोनस से रचा रिकॉर्ड

बिना सैलरी के भी अरबों की कमाई, FY25 में भारतीय दिग्गज कारोबारियों ने डिविडेंड और बोनस से रचा रिकॉर्

 

वित्त वर्ष 2025 में देश के कई शीर्ष कारोबारी और कंपनी प्रमोटर्स ने वेतन न लेकर भी भारी-भरकम कमाई की है। नंदन नीलेकणी, मुकेश अंबानी, दीपिंदर गोयल, मुरली दिवी, राहुल भाटिया, मोहित बर्मन, समीर मेहता और विकास ओबेरॉय जैसे दिग्गजों ने अपनी कंपनियों में हिस्सेदारी और प्रदर्शन आधारित बोनस के जरिए करोड़ों रुपये कमाए। यह ट्रेंड इस बात का संकेत देता है कि बड़े कारोबारी अब वेतन की बजाय कंपनी के मुनाफे से जुड़ी आय को प्राथमिकता दे रहे हैं।

 

Divis Laboratories के संस्थापक मुरली कृष्णन प्रसाद दिवी ने लगातार चौथे साल वेतन नहीं लिया, लेकिन FY25 में उन्हें 87.87 करोड़ रुपये का बोनस और 114 करोड़ रुपये का डिविडेंड मिला। उनकी कुल संपत्ति 9.8 अरब डॉलर आंकी गई है। Torrent Pharmaceuticals के चेयरमैन समीर उत्तमलाल मेहता ने भी वेतन छोड़ दिया, पर बोनस, कमीशन और डिविडेंड से कुल 1,996.5 करोड़ रुपये की कमाई की।

 

Oberoi Realty के चेयरमैन विकास ओबेरॉय 2015 से वेतन नहीं ले रहे हैं, लेकिन कंपनी में 58.5% हिस्सेदारी से उन्हें FY25 में 170 करोड़ रुपये का डिविडेंड मिला। इंफोसिस के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन नंदन नीलेकणी ने भी वेतन से परहेज करते हुए अपनी 1.1% हिस्सेदारी के आधार पर 45.7 करोड़ रुपये डिविडेंड के रूप में कमाए।

 

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी महामारी के बाद से वेतन नहीं ले रहे हैं। FY25 में कंपनी के 7,446 करोड़ रुपये के डिविडेंड में से प्रमोटर हिस्सेदारी के चलते उन्हें भी बड़ा हिस्सा मिला। InterGlobe Aviation के राहुल भाटिया ने अपने पूरे कार्यकाल में वेतन नहीं लिया, लेकिन 37.5% हिस्सेदारी से 145 करोड़ रुपये डिविडेंड कमाए।

 

जोमैटो के संस्थापक दीपिंदर सिंह गोयल और दाबर इंडिया के अमित, मोहित, साकेत व आदित्य बर्मन ने भी FY25 में वेतन नहीं लिया। दाबर के बर्मन परिवार को 936 करोड़ रुपये का फाइनल डिविडेंड मिला। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह रणनीति न केवल वेतन खर्च घटाती है, बल्कि कंपनियों के प्रदर्शन और मालिकों की कमाई को सीधे जोड़कर निवेशकों का भरोसा भी मजबूत करती है।

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