May 2, 2026

रुपए को सहारा देने के लिए आरबीआई का बड़ा कदम, बाजार में उतारे 44 हजार करोड़ के डॉलर

देश में रिकॉर्ड निचले स्तर की ओर बढ़ रहे रुपए को थामने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बड़ा दांव खेला है। केंद्रीय बैंक ने हाल के दिनों में विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करते हुए 44 हजार करोड़ रुपये (करीब 5 अरब डॉलर) के बराबर अमेरिकी मुद्रा बेच दी। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इस ट्रांजेक्शन से जुड़े सूत्रों ने बताया कि अगस्त महीने में ही यह कदम उठाया गया है, हालांकि आरबीआई की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान फिलहाल सामने नहीं आया है। अगर यह रुझान जारी रहता है तो यह जनवरी के बाद से अब तक की सबसे बड़ी डॉलर बिक्री साबित हो सकती है।

 

पिछले सप्ताह रुपया 87.89 प्रति डॉलर के स्तर तक आ गया, जो उसके सर्वकालिक निचले स्तर से बेहद करीब था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 6 अगस्त को रूस से तेल खरीदने की सजा के तौर पर भारतीय वस्तुओं पर आयात शुल्क को दोगुना कर 50 फीसदी करने के फैसले के बाद रुपये पर दबाव और बढ़ गया। इस झटके के चलते बाजार में विदेशी निवेशकों की धारणा भी कमजोर हुई और करेंसी पर बिकवाली का दबाव बढ़ा।

 

कमज़ोर रुपया सीधे तौर पर आयातित महंगाई को बढ़ा सकता है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर बोझ और बढ़ जाएगा। चूंकि भारत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और अन्य आवश्यक वस्तुएं आयात करता है, इसलिए डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी इन आयातित वस्तुओं की कीमतों में तेजी ला सकती है। यह स्थिति पहले से ही धीमी हो रही आर्थिक सुधार प्रक्रिया को और भी प्रभावित कर सकती है।

 

आरबीआई का यह हस्तक्षेप नए गवर्नर संजय मल्होत्रा के कार्यकाल में नीति रुख में संभावित बदलाव का संकेत देता है। दिसंबर में पदभार संभालने के बाद से अब तक केंद्रीय बैंक ने अपेक्षाकृत संयमित मुद्रा बाजार हस्तक्षेप की नीति अपनाई थी, लेकिन हालात की गंभीरता को देखते हुए अब बड़े पैमाने पर कदम उठाए जा रहे हैं।

 

आर्थिक जानकारों का मानना है कि अगर रुपये पर दबाव जारी रहता है तो आरबीआई को आने वाले दिनों में भी इसी तरह के हस्तक्षेप करने पड़ सकते हैं। हालांकि, ऐसे कदम से विदेशी मुद्रा भंडार पर असर पड़ेगा, लेकिन फिलहाल मुद्रा स्थिरता बनाए रखना केंद्रीय बैंक की प्राथमिकता दिख रही है।

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