इंडोनेशिया बनाम अमेरिका: सबसे बड़ा मुस्लिम देश क्यों अड़ा ट्रेड डील पर?

दुनिया के कई मुस्लिम देशों—सऊदी अरब, पाकिस्तान, तुर्की और कतर—का झुकाव अमेरिका की ओर साफ नजर आता है। ये देश वाशिंगटन की नीतियों के साथ कदम मिलाते दिखते हैं। लेकिन इसी बीच दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश इंडोनेशिया खुलकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ट्रेड नीतियों के खिलाफ खड़ा हो गया है। इंडोनेशिया ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील में उन शर्तों को मानने से इनकार कर दिया है, जो उसके मुताबिक उसकी संप्रभुता से समझौता कराने वाली हैं। जकार्ता के इस फैसले ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है और क्षेत्रीय राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है।

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका इंडोनेशिया पर “पॉइजन पिल” जैसी शर्तें थोपने की कोशिश कर रहा था। मई 2025 में अमेरिका ने इंडोनेशिया को उच्च टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू हुई। ट्रंप प्रशासन की मुख्य मांग यह थी कि इंडोनेशिया अमेरिका के अलावा किसी भी दूसरे देश—खासकर चीन—के साथ नई ट्रेड डील नहीं करेगा। विशेषज्ञों ने इस शर्त को ‘जहर की गोली’ बताते हुए कहा कि अगर जकार्ता इसे मान लेता, तो उसकी आर्थिक स्वतंत्रता लगभग खत्म हो जाती। इंडोनेशिया ने अब इस शर्त को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि वह अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा।

सवाल ये उठता है कि जब पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की जैसे देश ट्रंप प्रशासन से नजदीकियां बढ़ा रहे हैं, तब इंडोनेशिया ने इस तरह खुला विरोध क्यों किया? इसका जवाब देश की भू-राजनीतिक और आर्थिक रणनीति में छिपा है। इंडोनेशिया लंबे समय से चीन के साथ नजदीकी संबंध रखता है। हाल ही में उसने चीन से जेएफ फाइटर जेट खरीदने का बड़ा सौदा किया है। यदि इंडोनेशिया अमेरिका की शर्तें मान लेता, तो उसे चीन से दूरी बनानी पड़ती—जो उसके लिए किसी भी हाल में संभव नहीं था। जकार्ता की सरकार यह मानती है कि चीन उसके विकास और सुरक्षा के लिए एक अहम रणनीतिक साझेदार है।

ब्रॉडशीट एशिया की रिपोर्ट बताती है कि वर्तमान में चीन इंडोनेशिया का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 147.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर का है। इतनी बड़ी आर्थिक निर्भरता के बीच अमेरिका की खातिर चीन से संबंध तोड़ना इंडोनेशिया के लिए नुकसानदेह साबित होता। इसलिए इंडोनेशिया ने साफ कर दिया कि वह किसी भी देश के दबाव में अपनी आर्थिक और विदेश नीति नहीं बदलेगा।

इंडोनेशिया की 28 करोड़ आबादी में लगभग 91% मुसलमान हैं—यह उसे दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देश बनाता है। ऐसे में उसका अमेरिका के खिलाफ यह रुख वैश्विक इस्लामिक राजनीति पर भी बड़ा प्रभाव डाल सकता है। सऊदी और पाकिस्तान की तुलना में इंडोनेशिया का यह स्वतंत्र और आक्रामक रुख बताता है कि आने वाले समय में दक्षिण-पूर्व एशिया की शक्ति संतुलन राजनीति और भी दिलचस्प हो सकती है।

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